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बर्खास्त किए जाएंगे अखिलेश के कैबिनेट मंत्री?

Fri, 23 May 2014 06:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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लोकसभा चुनाव में करारी हार की समीक्षा का सिलसिला जारी रखते हुए सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को पार्टी विधायकों के साथ बैठक की।
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सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के सामने पेश हुए सपा के 200 से ज्यादा विधायकों ने भी मंत्रियों पर ही निशाना साधकर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

अधिकतर विधायकों के निशाने पर मंत्री रहे। उन्होंने अपने क्षेत्रों में चुनाव जीतने में नाकाम रहे मंत्रियों को हटाने की मांग की।

संभल के विधायकों ने कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद को प्रत्याशी की हार के लिए जिम्मेदार ठहराया तो हरदोई के विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नरेश अग्रवाल पर हमला किया।

मंत्रियों की खामियां गिनाते रहे विधायक

विधायकों ने आमतौर पर वोटों के ध्रुवीकरण को पार्टी प्रत्याशियों की हार का कारण माना लेकिन अपने मंत्रियों की खामियां गिनाने में भी पीछे नहीं रहे।

संभल के विधायकों ने कहा कि यदि इकबाल महमूद सक्रिय हुए होते तो शफीकुर्रहमान बर्क को मामूली वोटों से हार का सामना न करना पड़ता। पूरे चुनाव के दौरान बर्क और इकबाल के बीच तल्ख रिश्ते चर्चा में रहे।

अलीगढ़ के एक विधायक ने भी उनकी बात का समर्थन किया। हरदोई के विधायकों ने पार्टी की बदहाली के लिए नरेश अग्रवाल को जिम्मेदार ठहराया।

कहा कि उन्होंने न तो विधायकों को भरोसे में लिया और न ही अन्य नेताओं को।

'बत्ती' वालों पर जारी रहा बवाल

पूर्वांचल के अधिकांश विधायकों ने अपने मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मंत्रियों ने विधायकों से न तो तालमेल बैठाया और न ही उनकी बात सुनी।

जनता की समस्याओं के प्रति भी वे संजीदा नहीं रहे। उन्होंने ऐसे मंत्रियों पर कार्रवाई की मांग की जो अपने विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी को बढ़त नहीं दिला पाए।

उन्होंने मंत्रियों के बूथों पर मिले वोटों का आकलन करने की भी मांग की। विधायकों ने दर्जा प्राप्त मंत्रियों पर खासतौर से निशाना साधा।

कहा कि लालबत्ती लेकर वे दावतें खाने और डीएम, एसएसपी से प्रोटोकाल मांगने तक सीमित रह गए। उन्होंने चुनाव में पार्टी के लिए अपेक्षित योगदान नहीं किया।

नमो-नमो कर रहे थे अधिकारी

कई विधायकों ने कहा कि चुनाव के दौरान अधिकारी नमो-नमो कर रहे थे। उन्होंने न तो विधायकों की कोई बात सुनी और न ही विकास के कामों में दिलचस्पी दिखाई।

अलीगढ़ के एक विधायक ने तो यहां तक कहा कि डीएम ने उन्हें हवालात में डालने की चेतावनी दे डाली थी। विधायकों ने कहा, डीएम, एसएसपी, एसडीएम और थानेदारों तक पर उनकी बातें न सुनने का आरोप लगाया।

कई विधायकों ने मुलायम सिंह और अखिलेश यादव से सड़क, बिजली और कानून व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।

कहा कि सरकार की छवि बनाने में इन तीनों की अहम भूमिका होती है। एक विधायक ने तो चार महीने तक मुफ्त बिजली देने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इससे पार्टी के प्रति लोगों की नाराजगी दूर हो जाएगी।
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और नेताजी को आ गाया गुस्सा

कई विधायकों ने हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का तर्क दिया तो मुलायम सिंह ने कहा कि उन्होंने समय से इसकी जानकारी क्यों नहीं दी।

उन्होंने कहा कि नतीजों से हताश या मायूस होने की जरूरत नहीं है। छह महीने में नई सरकार से लोगों का मोह भंग हो जाएगा। सभी विधायकों अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों के सुख-दुख में शरीक में हों।

उन्होंने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जो जनता हराती है, वही बाद में जिताकर भेजती है।
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