नक्सल प्रभावित जिलों में प्रस्तावित अष्टकोणीय थाना भवनों के निर्माण में तेजी लाई जाएगी।
समय पर काम पूरा करने के लिए डीजीपी मुख्यालय ने संबंधित जिलों के अफसरों को शुक्रवार को निर्देश दिए हैं।
निर्माण कार्य की धीमी चाल पर केंद्र सरकार ने नाखुशी जताई थी। निर्माण कार्य समय पर नहीं होने पर केंद्र से मिलने वाली राशि रुक सकती है।
आंध्र प्रदेश की तर्ज पर थाना भवनों का निर्माण होना है। ये थाना भवन इस तरीके से होंगे जिससे आठ कोणों से बाहर नजर रखी जा सके।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था मुकुल गोयल ने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों चंदौली, सोनभद्र व मिर्जापुर में कुल 15 नए थाना भवन बनाए जाने हैं।
15 थानों में से सात में तो निर्माण कार्य संतोषजनक स्थिति में है, लेकिन आठ की प्रगति अच्छी नहीं कही जा सकती है।
इन आठ में भी तीन जगहों पर तो अभी निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका है। यह तीनों ही थाने सोनभद्र में बनने हैं।
इनमें गोरावल और शाहगंज थाने के निर्माण में अदालत का स्टे है, जबकि दुद्धी थाने के निर्माण में भू-स्वामित्व को लेकर वन विभाग के साथ विवाद हो गया है।
शुक्रवार को जो बैठक हुई, उसमें यह निर्देश दिए गए कि तीनों ही थानों के निर्माण कार्य को लेकर आ रही समस्या के समाधान के लिए जल्द ही जरूरी कदम उठाए जाएं।
एडीजी ने बताया कि निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए फरवरी तक का समय है।
इसके बाद भी अगर कार्य में तेजी नहीं आई तो इन आठ थानों के लिए जारी राशि केंद्र किसी अन्य मद में जारी कर सकता है।
उन्होंने बताया कि केंद्र से इस कार्य के लिए 8.25 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। इसमें से 2.90 करोड़ रुपये ही अभी तक खर्च किए जा सके हैं।
हर थाने पर दो करोड़ रुपये का खर्च
गोयल ने बताया कि केंद्र की योजना के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस थानों के निर्माण पर आने वाले खर्च का केंद्र 80 फीसदी तो राज्य 20 फीसदी देता है। हर थाने के निर्माण पर लगभग दो करोड़ रुपये का खर्च आएगा।