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यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : लखनऊ-हरदोई की सीमा पर एक हजार एकड़ में बनेगा टेक्सटाइल पार्क

Wed, 15 Feb 2023 12:29 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को चालू पेराई सत्र के लिए बढ़ोतरी न करते हुए गन्ने का मौजूदा मूल्य ही बनाए रखने पर सहमति दी है। वर्तमान सत्र की भांति ही गन्ने की अगैती प्रजाति के लिए 350 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य प्रजाति के लिए 340 रुपये और अस्वीकृत प्रजाति के लिए 335 रुपये प्रति क्विंटल ही रहेगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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प्रधानमंत्री मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) योजना के तहत लखनऊ-हरदोई की सीमा पर 1200 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जाएगा। टेक्सटाइल पार्क में करीब दस हजार से अधिक लोगों प्रत्यक्ष और करीब इतने ही लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को टेक्सटाइल पार्क के लिए लखनऊ और हरदोई जिले की कुल 1000 एकड़ भूमि निशुल्क हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को हस्तांतरित करने के प्रस्ताव मंजूरी दे दी।

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कैबिनेट बैठक के बाद संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मीडिया को बताया कि  केंद्र सरकार केवस्त्र मंत्रालय के सहयोग से देश में सात पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) पार्क की स्थापना की जानी है। प्रदेश में हरदोई और लखनऊ के बीच पीएम मित्र पार्क के लिए जमीन चिह्नित की गई है। यह भूमि हरदोई के गांव आंटगड़ी सौरा, अटारी, रूदानखेड़ा, विशुनपुर, जिंदाना, पारा भदराही, सालेहनगर और शाहमऊ और लखनऊ की मलिहाबाद तहसील के गांवों की जमीन ली जाएगी। हरदोई जिले की 259.09 एकड़ और लखनऊ की 903.07 एकड़ सहित कुल 1162.16 एकड़ भूमि है। इसमें से 1000 एकड़ भूमि निशुल्क हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। सैनिक कल्याण एवं पुनर्र्वास बोर्ड के लिए 20 करोड़ रुपये की व्यवस्था विभाग की ओर से की जाएगी।

संत कबीर के नाम पर गठित होगी एसपीवी
टेक्सटाइल पार्क के लिए संत कबीर पीएम मित्र टेक्सटाइल एंड अपैरल पार्क लिमिटेड के नाम से स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) का गठन किया जाएगा। इसके लिए दस करोड़ रुपये की व्यवस्था की जानी है। इसमें 51 प्रतिशत यूपी सरकार और 49 प्रतिशत भारत सरकार की हिस्सेदारी होगी। एसपीवी का गठन कंपनी एक्ट 2013 के तहत होगा। एसपीवी का गठन कर उसे भूमि निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। उसके बाद मास्टर विकासकर्ता का चयन कर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
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एसपीवी में केंद्र सरकार और यूपी सरकार के प्रतिनिधि नियुक्त किए जाएंगे। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव को एसपीवी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सचिव इसके अध्यक्ष होंगे। एसपीवी आवश्यकता के अनुसार तकनीकी अध्ययन के लिए, डीपीआर बनाने के लिए, तकनीकी और आर्थिक औचित्य की रिपोर्ट तैयार करने, पर्यावरण पर प्रभाव, पर्यावरण संरक्षण की एनओसी के लिए सलाहकार या एजेंसी चयन कर सकेगा। एसपीवी की ओर से परियोजना का संचालन पीपीपी मोड पर डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी) के आधार पर किया जाएगा।

राजकीय विभागों के 2150 संविदा कार्मिकों का मानदेय बढ़ने का रास्ता साफ

कैबिनेट ने राजकीय विभागों में तैनात 2150 संविदा कार्मिकों को संशोधित दर पर संविदा राशि (मानदेय) दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह वे संविदा कार्मिक हैं, जो नियमित रूप से सृजित पदों पर वर्ष 2013-14 या उससे पहले से लगातार काम कर रहे हैं और इनकी नियुक्ति तय चयन प्रक्रिया के तहत पारदर्शी ढंग से हुई है। साथ ही वे उस पद के लिए आवश्यक न्यूनतम अर्हता भी पूरी करते हैं। कैबिनेट के इस फैसले से इन कार्मिकों को 3000 रुपये से लेकर 11898 रुपये प्रति माह तक का लाभ होगा।

पूर्व में भी इन संविदा कार्मिकों का मानदेय छठे वेतनमान के न्यूनतम वेतन के आधार पर तय हुआ था, जिसे अब सातवें वेतनमान के आधार पर निर्धारित किया जाना है। इसकी सिफारिश वेतन समिति-2016 ने की थी, जिस पर मुख्य सचिव की समिति ने भी अपनी सहमति दे दी थी। 

इन 2150 कार्मिकों में करीब 400 संविदा पर विभिन्न अस्पतालों में तैनात डॉक्टर भी हैं। इन्हें वर्तमान में 65520 रुपये प्रति माह भुगतान होता है, जो इस फैसले के लागू होने पर 77418 रुपये हो जाएगा। अन्य संविदा कर्मी विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात हैं। वर्तमान में इनके मानदेय का न्यूनतम स्तर 21840 रुपये है, जो बढ़कर 24840 रुपये हो जाएगा।

इस मामले में मुख्य सचिव समिति की संस्तुतियों को यथावत स्वीकार कर लिया गया है। कृषि विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए वर्तमान में लागू व्यवस्था को यथावत बनाए रखने और राजकीय विभागों के संविदा कर्मियों को संशोधित दर पर संविदा राशि दिए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया। न्यायालयों ने भी इन कर्मियों को न्यूनतम वेतन दिए जाने के आदेश दिए हैं। इससे राज्य सरकार पर करीब 29 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना व्ययभार आएगा।

आयोग नहीं, अब कार्मिक विभाग करेगा स्टांप अधिकारियों की पदोन्नति

स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में समूह क और ख अधिकारियों की पदोन्नति अब राज्य लोकसेवा आयोग नहीं, बल्कि शासन का कार्मिक विभाग करेगा। कैबिनेट ने मंगलवार को उप्र स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग सेवा नियमावली 1982 के विभिन्न नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि इस नियमावली के कारण पदोन्नतियों में गतिरोध उत्पन्न हो रहा था। महानिरीक्षक, सहायक एवं उपमहानिरीक्षक और अपर महानिरीक्षक प्रबंधन की डीपीसी समय से नहीं हो पा रही थी। दरअसल, जिनकी नियुक्ति राज्य लोकसेवा आयोग करता है, उनकी पदोन्नति के लिए भी आयोग को ही सिफारिश भेजी जाती थी। अब कैबिनेट ने इसमें संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे अब प्रमोशन का अधिकार कार्मिक विभाग को मिल गया है। अब यदि पदोन्नतियों में देरी हुई तो कार्मिक विभाग ही जिम्मेदार होगा। मंत्री ने बताया कि अब जल्दी ही प्रमोशन हो सकेंगे। इस समय भी विभिन्न पदों पर प्रमोशन नहीं हुए हैं। अब इन पर जल्दी ही डीपीसी होगी।

आयोग नहीं, अब कार्मिक विभाग करेगा स्टांप अधिकारियों की पदोन्नति

स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में समूह क और ख अधिकारियों की पदोन्नति अब राज्य लोकसेवा आयोग नहीं, बल्कि शासन का कार्मिक विभाग करेगा। कैबिनेट ने मंगलवार को उप्र स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग सेवा नियमावली 1982 के विभिन्न नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि इस नियमावली के कारण पदोन्नतियों में गतिरोध उत्पन्न हो रहा था। महानिरीक्षक, सहायक एवं उपमहानिरीक्षक और अपर महानिरीक्षक प्रबंधन की डीपीसी समय से नहीं हो पा रही थी। दरअसल, जिनकी नियुक्ति राज्य लोकसेवा आयोग करता है, उनकी पदोन्नति के लिए भी आयोग को ही सिफारिश भेजी जाती थी। अब कैबिनेट ने इसमें संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे अब प्रमोशन का अधिकार कार्मिक विभाग को मिल गया है। अब यदि पदोन्नतियों में देरी हुई तो कार्मिक विभाग ही जिम्मेदार होगा। मंत्री ने बताया कि अब जल्दी ही प्रमोशन हो सकेंगे। इस समय भी विभिन्न पदों पर प्रमोशन नहीं हुए हैं। अब इन पर जल्दी ही डीपीसी होगी।

औरैया पुलिस लाइन में 238 करोड़ की लागत से बनेंगे आवासीय एवं अनावासीय भवन

कैबिनेट ने औरैया पुलिस लाइन में 238 करोड़ रुपये की लागत से आवासीय एवं अनावासीय भवनों के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने इसका निर्माण कार्य पूरा करने के लिए डेढ़ वर्ष की अवधि तय की है। इसके निर्माण में उच्च विशिष्टियों के लिए 238 करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

किसानों से 31 सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूमि खरीदेगा यीडा

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर के विस्तार और औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए किसानों से जमीन 31 सौ रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से खरीदेगा। कैबिनेट ने प्राधिकरण क्षेत्र में काश्तकारों से आपसी सहमति से भूमि खरीदने के लिए दर पुनरीक्षित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए निवेश करार के तहत उद्यमियों को सेक्टर-9 में जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर के उत्तर, पश्चिम और पूरब में पेरीफेरल रोड निर्माण के लिए और भविष्य में अतिक्रमण की संभावना के मद्देनजर रोड सहित 500 मीटर की भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण का व्ययभार प्राधिकरण वहन करेगा। इससे राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार नहीं आएगा। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण से प्राधिकरण क्षेत्र में बनने वाली फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, इंडस्ट्रियल पार्क, ट्वॉय पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना को रफ्तार मिलेगी।

5472 करोड़ से आधुनिक बनेंगे 150 आईटीआई

प्रदेश के 150 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) 5472.96 करोड़ से आधुनिक बनाए जाएंगे। कैबिनेट ने टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड (टीटीएल) व व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के बीच मेमोरेंडम ऑफ  एग्रीमेंट (एमओए) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 10 साल नौ माह के इस प्रोजेक्ट पर टीटीएल 4282.96 करोड़ और राज्य सरकार 1190 करोड़ खर्च करेगी। प्रस्ताव के मुताबिक इस रकम से चयनित आईटीआई में लैब व स्मार्ट क्लास का निर्माण और मशीनों की खरीद कर उनमें आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। एमओए में दोनों पक्षों के कार्यों व शर्तों का उल्लेख अलग से किया गया है। 10 वर्ष पूरा होने के बाद दोनों पक्षों की सहमति से इसे नवीनीकृत करने पर विचार किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार इंडस्ट्री की मांग के अनुसार टीटीएल चयनित आईटीआई में 11 दीर्घ व 23 अल्प अवधि के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चलाएगा। टीटीएल के प्रशिक्षक इन आईटीआई में पहले से तैनात प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण भी देंगे। प्रशिक्षणार्थियों को टीटीएल की सहयोगी कंपनियों में ऑन जॉब ट्रेनिंग का भी अवसर मिलेगा। सफल प्रशिक्षणार्थियों को टीटीएल की सहयोगी कंपनियों व अन्य में अप्रेंटिसशिप व नौकरी के भी द्वार खुलेंगे। दीर्घकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सालाना करीब 15 हजार तथा अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सालाना लगभग 20 हजार अभ्यर्थी प्रशिक्षित होंगे।

पर्यटकों के लिए वासुदेव वाटिका विकसित करने को हरी झंडी

मथुरा में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए पर्यटन विभाग एक आदर्श विश्राम स्थल (वासुदेव वाटिका) बनाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग से गोकुल बैराज के पास की भूमि पर्यटन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने पर मंगलवार को कैबिनेट ने मुहर लगा दी। यहां पर ब्रज की स्थानीय प्रजातियों के पौधों को भी रोपा जाएगा। साथ ही पर्यटकों के लिए आकर्षक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। मथुरा में मथुरा, वृंदावन, गोकुल, महावन, बल्देव, बरसाना, नंदगांव व गोवर्धन आदि पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थल हैं। यहां पर देश-विदेश से लाखों पर्यटक श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के दर्शन के लिए आते हैं।

गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी नहीं, किसान कर रहे थे 400 से 450 रुपये प्रति क्विंटल की मांग

प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को चालू पेराई सत्र के लिए बढ़ोतरी न करते हुए गन्ने का मौजूदा मूल्य ही बनाए रखने पर सहमति दी है। वर्तमान सत्र की भांति ही गन्ने की अगैती प्रजाति के लिए 350 रुपये प्रति क्विंटल, सामान्य प्रजाति के लिए 340 रुपये और अस्वीकृत प्रजाति के लिए 335 रुपये प्रति क्विंटल ही रहेगा। पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले पेराई सत्र 2021-22 के लिए मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्घि की गई थी। किसानों की मांग थी कि गन्ने की लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में इस वर्ष दाम कम से कम 400 से 450 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किए जाएं। जानकार बताते हैं कि चुनाव से पहले मूल्य बढ़ाने की रवायत बनती जा रही है। ऐसे में अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले मूल्य में वृद्धि की संभावना नहीं थी। अब सरकार अगले साल गन्ने का दाम बढ़ा सकती है। हालांकि भाजपा के कई सांसदों की भी मांग थी कि इस बार चाहे थोड़ा ही सही, पर मूल्य वृद्धि होनी चाहिए। अगले साल इसे चुनावी लॉलीपॉप कहा जाएगा। हालांकि, कैबिनेट ने पेराई सत्र 2022-2023 के लिए राज्य परामर्शित मूल्य पिछली बार के बराबर ही रखा। समिति ने यही सिफारिश भी की थी।

पैरामेडिकल छात्रों को मिली राहत, काउंसिल गठन को मंजूरी

प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों से पैरामेडिकल में डिप्लोमा और डिग्री कोर्स करने वाले छात्रों केलिए खुशखबरी है। प्रदेश कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में भी राज्य सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख परिषद (एलाएड एंड हेल्थ केयर काउंसिल) गठन को मंजूरी दे दी है। इससे पैरामेडिकल के करीब 56 से अधिक कोर्स करने वाले छात्रों का पंजीयन हो सकेगा। वे दूसरे राज्य में भी आसानी से नौकरी हासिल कर सकेंगे। इससे हर साल करीब 10 हजार से अधिक छात्रों को फायदा मिलेगा। इस मुद्दे को अमर उजाला प्रमुखता से लगातार उठाता रहा है।

मेडिकल, फार्मासिस्ट और नर्सिंग काउंसिल की तरह ही पैरामेडिकल कोर्स करने वालों का पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम (द नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल एक्ट) 2021 बनाया गया है। इस अधिनियम के आधर पर राज्यों को निर्देश दिया गया था कि राज्य स्तरीय काउंसिल का गठन करें। जिन राज्यों ने इसका गठन कर लिया है, वे पंजीयन नंबर जारी करने लगे हैं। ऐसे में वहां उत्तर प्रदेश के छात्रों को रोजगार के लिए आवेदन करने में समस्या हो रही थी।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब स्वायत्तशासी परिषद गठित होगा। इसके सभापति और सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। सभापति किसी चिकित्सा विश्वविद्यालय से जुड़ा अथवा पैरामेडिकल कोर्स में परास्नातक (पीजी) और करीब 25 वर्ष का अनुभव रहने वाले को बनाया जाएगा। इसमें पैरामेडिकल में 10 साल का अनुभव अनिवार्य है। परिषद सभापति और सदस्यों को राज्य सरकार के वेतन मैट्रिक्स 131100-216600 के समतुल्य यात्रा भत्ता एवं दैनिक भत्ते दिए जाएंगे। सचिव पद प्रतिनियुक्ति के आधार पर होगा और उसे पे मैट्रिक्स लेवल 13 दिया जाएगा। सेवानिवृत्त कार्मिक की दशा में अंतिम वेतन में से पेंशन की राशि घटाकर अनुमन्य होगा।

क्या होगा फायदा
काउंसिल की जिम्मेदारी होगी कि वह डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों की तरह ही फिजियोथेरेपी, आप्टोमेटिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, डायलिसिस टेक्नीशियन, डायटीशियन सहित पैरामेडिकल क्षेत्र में 56 से अधिक कोर्स करने वालों का पंजीयन करें। पंजीयन नंबर आवंटित कर रोजगार उपलब्ध कराए। पैरामेडिकल कॉलेजों के पठन-पाठन की निगरानी और  शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाए।

राजकीय विभागों में संविदा कर्मियों का मानदेय बढ़ने का रास्ता साफ

कैबिनेट ने राजकीय विभागों में तैनात संविदा कर्मियों को संशोधित दर पर संविदा राशि दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह वे संविदा कर्मी हैं, जो नियमित श्रेणी के पदों पर वर्ष 2013-14 से काम कर रहे हैं। पूर्व में भी इनका मानदेय छठे वेतनमान के आधार पर तय हुआ था, जिसे अब सातवें वेतनमान के आधार पर निर्धारित किया जाना है। इसकी सिफारिश वेतन समिति-2016 ने की थी, जिस पर मुख्य सचिव की समिति ने भी अपनी सहमति दी। इस मामले में मुख्य सचिव समिति की संस्तुतियों को यथावत स्वीकार कर लिया गया है। कृषि विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए वर्तमान में लागू व्यवस्था को यथावत बनाए रखने और राजकीय विभागों के संविदा कर्मियों को संशोधित दर पर संविदा राशि दिए जाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकार कर लिया। इससे राज्य सरकार पर करीब 29 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना व्ययभार आएगा।

राज्यपाल 20 फरवरी को पेश करेंगी अभिभाषण

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल 20 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र के पहले दिन विधानमंडल सदस्यों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगी। प्रदेश कैबिनेट ने राज्यपाल के अभिभाषण के मसौदे को मंजूरी दे दी है। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण को पेश करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल अभिभाषण में प्रदेश सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियां बताएंगी। वहीं ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन की सराहना भी करेंगी। साथ ही यूपी में आयोजित जी-20 बैठकों का भी जिक्र अभिभाषण में करेंगी।

मंत्रिपरिषद ने जताया मुख्यमंत्री का आभार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं देते हुए उनका आभार जताया। मंत्रियों ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ है। इसमें रिकार्ड 33.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश करार हुए हैं। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रदेश में सुशासन और बेहतर कानून व्यवस्था के चलते देश-विदेश के निवेशक यूपी में निवेश करने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भी समिट के आयोजन में सभी मंत्रियों की सक्रियता और मेहनत के लिए उनका आभार जताया।
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विद्युत परियोजना के लिए नलकूप की जमीन देने पर सहमति

कानपुर में निर्माणाधीन विद्युत परियोजना के लिए राजकीय नलकूप की 0.0560 हेक्टेयर जमीन को सशुल्क हस्तांतरित करने के लिए मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। कानपुर नगर की तहसील घाटमपुर में मैसर्स नेयवेली उप्र पावर लि. तापीय विद्युत परियोजना का निर्माण कर रही है। इस परियोजना में सिंचाई विभाग की भूमि प्रभावित है,  जिसमें राजकीय नलकूप लगा है। सिंचाई विभाग ने इस जमीन को देने का प्रस्ताव तैयार किया, जिस पर कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। यहां का सर्किल रेट 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जिसका चार गुना 4800 रुपये प्रति वर्ग मीटर बनता है। इस जमीन के बदले निर्माणकर्ता कंपनी सिंचाई विभाग को 26.88 लाख रुपये का भुगतान करेगी।
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