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हाईकोर्ट ने साली से अवैध संबंध के आरोपी पिता को नहीं दी बच्चों की कस्टडी

Tue, 05 Jul 2016 04:07 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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बच्चे की कस्टडी को लेकर मां और पिता के अधिकार समान हैं। मां के पास भी वही अधिकार हैं जो किसी पिता का अपने बच्चे पर हो सकते हैं। अदालत किसी एक के अधिकार को स्वीकार नहीं कर सकती। 
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पति से अलग हो चुकी महिला से बच्चों की कस्टडी मांगने के लिए एक पति की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सोमवार को यह बात कही। 

कोर्ट में याचिका दायर कर पति असलम खान ने कहा था कि आरजू बेगम से 1993 में उसकी शादी हुई थी। उसे चार बेटियां हुईं जिनमें दो बालिग हैं। छोटी बेटियों की उम्र नौ व आठ वर्ष है। 
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आरजू को उसकी बहन और कुछ रिश्तेदार बहलाकर अपने साथ ले गए हैं। वे उसे विशेष तरह की इबादत करवाके बेटा पैदा होने का लालच दे रहे हैं। आरजू अपने साथ दोनों छोटी बेटियों के अलावा कैश व जेवर भी ले गई है। 

इसकी शिकायत जुलाई 2015 में बहराइच के महिला थाने व डीएम से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उसने अदालत से अपनी पत्नी को छुड़ाने व बेटियों की कस्टडी दिलाने की प्रार्थना की थी।
 
दूसरी ओर असलम की पत्नी ने 19 अगस्त 2015 को कोर्ट में पेश होकर बताया कि वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती क्योंकि वह खराब व्यवहार करता है। वह किराए के मकान में रह रही है। आरजू ने दोनों छोटी बेटियों को भी अदालत में प्रस्तुत किया। 

कोर्ट ने असलम को बेटियों के खर्च के लिए 25 हजार रुपये जमा कराने के आदेश दिए, जो उसने जमा करवाए। वहीं, आरजू बेगम ने अदालत को बताया कि उसकी 48 वर्षीय बहन और असलम के बीच अवैध संबंध हैं। 

बहन उनके साथ ही रहती है। असलम ने उसका नाम राशन कार्ड में अपनी पत्नी के तौर पर लिखवा दिया है, जबकि दोनों ने निकाह तक नहीं किया है।
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दागी माता-पिता को नहीं सौंपे जा सकते बच्चे

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इन हालात में उसके पास अपने बच्चों को लेकर पति से अलग होकर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। बच्चों को पिता के साथ नहीं रखा जा सकता। आरजू के इस आरोप पर असलम ने उसके खिलाफ मानहानि का केस करने की चेतावनी दी।
 
जस्टिस महेंद्र दयाल ने अपने निर्णय में कहा, पत्नी साफ तौर पर पति के साथ न रहने की बात कह चुकी है। कोर्ट के लिए बच्चों का हित सर्वोपरि है। यह निर्धारित कानून है कि नाबालिगों की कस्टडी मामले में कोर्ट किसी को अभिभावक नियुक्त नहीं कर सकता। 

उसे केवल यह देखना है कि बच्चे का कल्याण किसमें है। इस मामले में पिता यह साबित नहीं कर पाया है कि मां को कस्टडी देने में बच्चों का कल्याण नहीं है। ऐसे में बच्चे मां आरजू बेगम के पास ही रहेंगे। पिता की ओर से जमा कराए गए 25 हजार रुपये बच्चों के रोजमर्रा के खर्च के लिए दिए जाएं। आरजू बेगम यह सुनिश्चित करेंगी कि असलम हर 15 दिन में अपने बच्चों से मिल सके ।

पति की हत्या के आरोप में ट्रायल पर चल रही महिला को उसके बच्चों की कस्टडी देने से हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इन्कार किया है। बच्चे अपने चाचा के साथ रह रहे हैं। जमानत पर रिहा महिला ने बच्चों की 

हाईकोर्ट ने सोमवार को याचिका खारिज करते हुए अपने निर्णय में कहा, बच्चों की उम्र छह और चार साल है और उनकी भलाई सबसे महत्वपूर्ण है। मां चाहे तो 15 दिन में एक बार दिन के समय बच्चों से मिल सकती है। 

कृष्णा गोस्वामी ने दो अबोध बच्चों की ओर से याचिका दायर की थी। इसमें बताया गया था कि कृष्णा के देवर वीरेंद्र गिरि के पास दोनों बच्चे हैं। उसका विवाह राकेश गिरि से हुआ था जो विधुर थे। राकेश की पहली शादी कृष्णा की ही बहन किरण से हुई थी। कस्टडी के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
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बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए लिया फैसला

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एक बच्चे को जन्म देने के बाद किरण की मृत्यु हो गई। दूसरा बच्चा कृष्णा और राकेश के विवाह के बाद हुआ। याचिका में कहा गया कि राकेश और वीरेंद्र में परिवार की कृषि भूमि को लेकर विवाद था। एक रोज वीरेंद्र अपने कुछ सहयोगियों के साथ राकेश को कृषि भूमि के खरीदारों शमशाद और रफत अली से मिलवाने ले गया।  ‌
उसके बाद से राकेश कभी नहीं लौटा। कृष्णा के अनुसार उसने इसकी शिकायत पुलिस में की लेकिन एफआईआर नहीं लिखी गई। 
वहीं, वीरेंद्र द्वारा पुलिस में की गई शिकायत पर कृष्णा के खिलाफ अपने पति की हत्या के लिए अपहरण कराने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 

उसके बच्चों को वीरेंद्र अपने पास ले गया। 25 मई 2015 को कृष्णा को जमानत मिली। वह घर गई तो वहां ताला लगा मिला। बच्चे देवर वीरेंद्र के पास थे। उसने याचिका में कहा, बच्चे अवैध रूप से वीरेंद्र के पास रखे गए हैं जबकि मां होने के नाते यह अधिकार उसका है। वीरेंद्र ने आरोपों से इन्कार करते हुए कहा, कृष्णा ही राकेश को जमीन बेचने के लिए मजबूर व परेशान करती थी जबकि वह तैयार नहीं थे।

उनके घर में किरायेदार हरबंश मिश्रा से कृष्णा के अवैध संबंध बन गए थे। दोनों ने मिलकर संपत्ति के लिए राकेश की हत्या कर दी। इस मामले में एफआईआर हुई और कृष्णा व हरबंश को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर केस चल रहा है। ऐसे में बच्चों की कस्टडी कृष्णा को नहीं दी जानी चाहिए।
 
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस महेंद्र दयाल ने कहा, कोर्ट के लिए सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा और उनका सही लालन-पालन है। उनकी मां कृष्णा गोस्वामी पर पति की हत्या का केस चल रहा है। वह ऐसा कोई कारण नहीं बता पाई, जिससे बच्चों की सुरक्षा को उनके चाचा वीरेंद्र गिरि के यहां खतरा महसूस हो। 

राकेश की हत्या किसने की, यह मामला अभी कोर्ट तय नहीं कर सकता। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप भी याचिका का विषय नहीं हैं। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा, कृष्णा चाहे तो बच्चों के गार्जियन की नियुक्ति व कस्टडी के लिए उचित फोरम में जा सकती है। चूंकि वह मां है, इसलिए उसे अधिकार दिया जाता है कि वह बच्चों से पंद्रह दिन में एक बार मिल सकती है।
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