केजीएमयू के डॉक्टरों ने 13 साल की मासूम की लौटाई सुंदरता, हाथ पर बनाया कान, फिर किया प्रत्यारोपण
केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में डॉक्टरों ने हाथ पर कान विकसित कर 13 साल की किशोरी में इसे इंप्लांट किया है।
बालिका का एक कान दो साल पहले थ्रेसर में कट गया था। इस इंप्लांटेशन के बाद बच्ची के चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
गोंडा निवासी किशोरी अगस्त 2018 में थ्रेशर मशीन की चपेट में आ गई थी। इससे उसका दाहिना कान उखड़ कर जमीन पर गिर गया।
घर वाले उसे तत्काल केजीएमयू लेकर आए तो डॉक्टरों ने सर्जरी कर कान को उसकी जगह पर स्थापित कर दिया। लेकिन संक्रमण हो गया।
डॉक्टरों ने प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता बताई, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इस पर बच्ची के घरवालों ने मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद मांगी।
आर्थिक मदद स्वीकृत होने में समय लगा, जिसके बाद डाक्टरों ने अब सर्जरी की। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. बृजेश मिश्रा का कहना है कि आमतौर पर कान बनाने के लिए जिन मांसपेशियों की जरूरत होती है वह उसी स्थान पर दोबारा नहीं बन पातीं।
इसी कारण दोबारा कान बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। इसके लिए डॉक्टरों ने फ्री लैमिनेटेड फ्री फ्लैप सर्जरी का सहारा लिया। उसके हाथ की कलाई पर कान का फ्रेम वर्क बनाया गया।
इसको बनाकर हाथ की ऊपरी त्वचा व नीचे वाली त्वचा के बीच में इंप्लांट कर दिया। छह माह बाद हाथ से कान हटाकर चेहरे पर लगा दिया गया।
नवंबर अंत में बच्ची के कान को इंप्लांट किया गया। केजीएमयू में पहली बार हाथ पर कान बनाकर इंप्लांट किया गया।
सर्जरी में शामिल टीम
सर्जरी में डॉ. बृजेश मिश्रा के साथ डॉ. केरल, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. शिल्पी व डॉक्टर सोनिया शामिल रही। डॉ. मिश्रा का कहना है कि सीएम सहायता कोष से मिली राशि की वजह से ऑपरेशन में काफी मदद मिली। राशि से परिजन टिशू एक्सपेंडर एवं माइक्रो सर्जरी में उपयुक्त होने वाली वस्तुओं को आसानी से क्रय कर सके।