मेट्रो रेल परियोजना के दोनों कॉरिडोर के लिए करीब 7500 करोड़ रुपये के कर्ज जुटाने की चुनौती को लेकर प्रदेश सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक 11 नवंबर को होगी।
प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में डीपीआर में कर्ज के संबंध में शामिल बातों का ब्योरा तलब किया गया है।
इसी मीटिंग में तय होगा कि किस एजेंसी से लोन लेना उपयुक्त होगा और इसकी प्रक्रिया कब और किस तरह से शुरू की जाए।
प्रमुख सचिव नियोजन संजीव मित्तल की ओर से इस आशय की मीटिंग बुलाई गई है।
मेट्रो रेल परियोजना दो फेज में संचालित की जा रही है। जिस पर लगभग 12500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
इसमें 20 फीसदी धन केंद्र और 20 फीसदी राज्य सरकार खर्च करेगी।
जबकि,बकाया 60 फीसदी रकम जो कि लगभग 7500 करोड़ रुपये होगी, उसकी व्यवस्था बतौर ऋण सरकार करेगी।
पहले चरण में अमौसी से आलमबाग के बीच के स्ट्रेच के निर्माण को सरकार ने पूरी तरह से अपने धन से कराने का फैसला किया है।
इसके बाद में कर्ज और केंद्र के हिस्से से काम आगे बढ़ाया जाएगा।
इस संबंध में फिलहाल दो मुख्य एजेंसियों को लेकर सरकार की ओर से रुचि जाहिर की गई है।
जापानी कंपनी जाइका और एशियन डवलपमेंट बैंक का प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है।
इनके अलावा भी कुछ संस्थाएं इसके लिए शामिल की जा सकती हैं। इसी संबंध में 11 नवंबर को नियोजन विभाग बैठक करेगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मेट्रो को केंद्र से हरी झंडी शीघ्र
केंद्र सरकार लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना को अगले कुछ दिनों में सैद्धांतिक सहमति दे सकती है।
इस संबंध में जितने भी विभागों से टिप्पणी लखनऊ मेट्रो की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के संबंध में मांगी गई थी, उन सबने अपनी-अपनी आख्या दे दी है।
केवल योजना विभाग की टिप्पणी आना बाकी है। इस संबंध में राय मिलते ही राजधानी में मेट्रो रेल परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए स्वीकृति मिल जाएगी।
इस संबंध में केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।