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आतंक की फौज में चल रही लड़ाकों की भर्ती

Tue, 01 Apr 2014 08:48 AM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
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आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) को सशक्त बनाने की मुहिम चल रही है।
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संगठन के ओहदेदार तीन तरफा भर्ती करने के साथ ही अन्य आतंकी संगठनों जैसे लश्कर और अलकायदा से गठजोड़ कर रहे हैं।

सिमी से उसके रिश्ते पहले से ही बन चुके हैं। अब तहरीक-ए-तालिबान व लश्कर-ए-तैयबा से उसके गठजोड़ के साक्ष्य भी सामने आ चुके हैं।

आईएम के इरादों से खुफिया एजेंसियां चौकन्ना हो गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न जांच एज़ेंसियों के चंगुल में आईएम के सौ से अधिक सदस्य आ चुके हैं।

यासीन भटकल, असदुल्ला उर्फ हड्डी, तहसीन अख्तर, वकास जैसे इंडियन मुजाहिदीन के बड़े ओहदेदारों के पूर्व में पकड़े जाने के साथ ही अभी तक यह समझा जा रहा था कि अब आईएम की कमर टूट चुकी है।

लेकिन कुछ दिनों पहले गिरफ्तार हुए वकास और तहसीन से दिल्ली में हो रही पूछताछ के साथ ही लखनऊ में एटीएस द्वारा कपड़े गए मोहम्मद ओवैस व अब्दुल वलीद से हो रही पूछताछ में जो तथ्य सामने आए हैं उससे खुफिया एजेंसियों की परेशानी बढ़ गई है।
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दूसरी तरफ केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी व रॉ आदि ने भी अपने स्तर से जो जानकारी जुटाई है, उससे भी पूछताछ में सामने आए तथ्य मेल खा रहे हैं।

जांच एज़ेंसियों को गिरफ्तार आतंकियों ने बताया है कि इंडियन मुजाहिदीन संगठन में अब नए सिरे से मेंबर बढ़ाए जा रहे हैं।

नए जुड़ने वाले युवकों को पहले गोरिल्ला प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है और फिर उन्हें मेल, इंटरनेट, वे साइट और चैटिंग आदि करने की तकनीक बताई जाती है।

इसके साथ ही उनसे छोटे-छोटे काम कराकर उनकी क्षमता की जांच की जाती है। ऐसे कई सदस्यों को तैयार कर देश के विभिन्न प्रांतों में भेजा भी जा चुका है।

एटीएस अधिकारियों के अनुसार अभी तक कुल कितने लोगों को भेजा जा चुका है, इसकी सही जानकारी सामने नहीं आ सकी है लेकिन यह माना जा रहा है कि इनकी संख्या दर्जनों में है।

आईएम के इस नए पैंतरे के बारे में केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने भी पिछले दिनों अन्य जांच एजेंसियों को अलर्ट किया था।

कहा गया था कि यासीन भटकल के गिरफ्तार होने के बाद रियाज भटकल और शादाब बेग अलग-अलग हो गए हैं।

ऐसे ही डॉ. शाहनवाज भी अलग हो गया है। लेकिन यह सभी अपने-अपने स्तर पर संगठन में नए लोगों को जोड़ने की मुहिम में लगे हुए हैं।

इस काम में सिमी और आजमगढ़ के वह युवक खास तौर पर सक्रिय हैं जो बाटला हाउस कांड के बाद प्रकाश में आए थे।
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