आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) का नेटवर्क नेपाल सीमा पर फैला हुआ है। संगठन के कई सदस्य सीमा पर सक्रिय रह कर पाकिस्तान में बैठे आकाओं के इशारे पर काम कर रहे हैं।
इस बात की पुख्ता जानकारी पिछले दिनों गिरफ्तार तहरीक-ए-तालिबान से प्रशिक्षित दो पाक आतंकियों से हुई पूछताछ में सामने आई है।
दोनों से पूछताछ कर रही एटीएस ने सोमवार को सात दिन की रिमांड अवधि समाप्त होने पर उन्हें वापस जेल में निरुद्ध करा दिया है।
आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता ने स्वीकार किया कि दोनों ही आतंकियों से पूछताछ के दौरान अहम जानकारी मिली है।
पाकिस्तान से मस्कट फिर नेपाल
इस जानकारी के आधार पर एटीएस गोरखपुर के माड्यूल पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नेपाल में अब आतंकियों को सीधे पाकिस्तान से नहीं भेजा जा रहा है।
उन्हें पाकिस्तान से किसी खाड़ी देश में भेजा जाता है और वहां से नेपाल पहुंचाया जाता है। इन दोनों आतंकियों के मामले में भी ऐसा ही किया गया था।
आतंकी अब्दुल वलीद व मोहम्मद ओवैस को पाकिस्तान से पहले मस्कट पहुंचाया गया। वहां से एयर ओमान से उन्हें नेपाल लाया गया।
नेपाल में मुहैया कराई जाती है भारतीय आईडी
नेपाल में सक्रिय आतंकी वहां पहुंचने वाले अपने साथियों को नेपाल में ही नकली भारतीय आईडी (पहचान पत्र) मुहैया कराते थे।
इन दोनों आतंकियों को भी वहां नकली भारतीय आईडी दी गई। उनके असली पासपोर्ट काठमांडू में ही रख लिए गए थे।
जो नकली दस्तावेज और प्रमाण पत्र दिए जाते थे, वे देखने में एकदम असली जैसे होते थे। इसी वजह से जांच में ऐसे दस्तावेजों पर शक नहीं हो पाता था।
गोरखपुर समेत कुछ और माड्यूल पर नजर
आईज़ी ने बताया कि दोनों आतंकियों से जो जानकारी मिली है उससे सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि कुछ और माड्यूल के भी सुराग लगे हैं।
उन्होंने यह नहीं बताया कि बाकी के और माड्यूल कहां-कहां हैं। इस बाबत एटीएस गंभीरता से काम कर रही है और जल्द ही नतीजे सामने आएंगे।
उन्होंने बताया कि दोनों आतंकियों से एटीएस ही नहीं बल्कि केंद्रीय खुफिया एज़ेंसी आईबी और विभिन्न प्रांतों के पुलिस अधिकारियों ने भी पूछताछ की।