एके जैन ने वर्ष 2014 में सरकार को सौंपी रिपोर्ट में स्थानीय वन व राजस्व कार्मिकों के अलावा राजनेताओं और अधिकारियों के गठजोड़ का जिक्र किया था। उन्होंने शासन के एक वरिष्ठ अफसर की शह बताते हुए मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश भी की थी।
तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक, मूल्यांकन एवं कार्ययोजना ओमेंद्र शर्मा ने इस रिपोर्ट को आगे बढ़ाते हुए समुचित कार्रवाई के लिए लिखा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस बीच, 11 जुलाई 2018 को एक सड़क हादसे में जैन की मौत हो गई। जानकारों का कहना है कि यह अभी रहस्य है कि यह हादसा था या जानबूझकर कराया गया हमला।
तत्कालीन सचिव वन को भी ठहराया था जिम्मेदार
जैन ने पूरे मामले में तत्कालीन सचिव वन को भी जिम्मेदार ठहराया था। उन्हीं के मौखिक निर्देश पर अवैध कब्जों से संबंधित कुछ मामलों में कोर्ट में विचाराधीन केस वापस लिए गए थे।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम अपनी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपेगी। उसके बाद अंतिम कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इस मामले को ‘अमर उजाला’ वर्ष 2015 से ही प्रमुखता से उठा रहा है। इसी का नतीजा है कि अखिलेश सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर एक बड़े औद्योगिक ग्रुप को जमीन देने का निर्णय वापस लेना पड़ा था।