मलिहाबाद में दतली और खड़ता गांव में 11 जनवरी 2015 को राजधानी का सबसे बड़ा शराब कांड हुआ था। इस कांड में मलिहाबाद, बंथरा, सरोजनीनगर के अलावा उन्नाव और रायबरेली के 102 लोगों की मौत हो गई थी। दतली और खड़ता गांव के हर घर में कोई न कोई महिला विधवा हुई थी। वहां क्रिकेट मैच के फाइनल में लोगों को जहरीली शराब बांटी गई थी। शराब पीने के घंटेभर बाद ही लोगों पर असर दिखना शुरू हो गया था। जहरीली शराब का असर आज भी कई लोगों पर है। उनकी आंखों की रोशनी या तो जा चुकी है या फिर कम हो गई है।
घातक रसायन के इस्तेमाल से जानलेवा हो जाती है शराब
अवैध शराब के कारोबारी कच्ची शराब में नशा बढ़ाने के लिए घातक रसायन का इस्तेमाल करते हैं। स्प्रिट, नौसादर, यूरिया, धतूरा व नीम की पत्नी सामान्य तौर पर इस्तेमाल होती हैं। कुछ शराब कारोबारी ऑक्सीटोसिन नाम का इंजेक्शन प्रयोग करते हैं तो कुछ कीटनाशक भी मिलाते हैं। मलिहाबाद के दतली और खड़ता गांव में कच्ची शराब का नशा बढ़ाने के लिए मिथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल किया गया था। इस केमिकल की मात्रा ज्यादा होने से कुछ ही घंटे में मौत हो जाती है। आंखों की रोशनी चली जाती है। आंतें कट जाती हैं पेट में घाव हो जाते हैं।
यहां दर्जनों गांवों में अवैध शराब की भट्ठियां कुटीर उद्योग के रूप में विकसित हो चुकी हैं। कई गांव ऐसे हैं जो थाने के एक किलोमीटर की परिधि में हैं। इसके बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। अवैध शराब का धंधा खखरा, चौकी, थरी, शाहमऊ, गौरैया, कोलवा, तेहतना, बाजार गांव, रुदानखेड़ा, जगदीशपुर, पतौना, अटवा, हद्दो, मसीढ़ा पीरनगर, करौरा, जिंदाना, दन्नौर, बहरौरा में बड़े पैमाने पर होता है। इन गांव से शराब की सप्लाई सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी केसीमावर्ती गांवों तक होती है।
इटौंजा : डेढ़ दर्जन गांवों में चल रहा धंधा
सीतापुर, हरदोई और बाराबंकी बार्डर से सटा होने के चलते यहां अवैध शराब का धंधा खूब फल-फूल रहा है। यहां के लासा, दुघरा, जममखनवां, खानपुर, बहादुरपुर, सुल्तानपुर, भोपालपुर, सहादतनगर गढ़ा सहित डेढ़ दर्जन गांवों में सैकड़ों लोग अवैध शराब बनाने और बेचने का काम करते हैं।
बीकेटी : तीन जिलों से शराब का धंधा
यहां परसऊ, बीरमपुर, गोसाईपुरवा सहित कई गांवों में देसी शराब बनाई और बेची जाती है। सीतापुर, हरदोई और बाराबंकी सीमा क्षेत्र होने के चलते तीनों जनपदों से अवैध शराब का आदान-प्रदान होता है।
मोहनलालगंज : पुलिस का दावा, नहीं बिकती अवैध शराब
यहां इंद्रजीतखेड़ा, भीलमपुर और केसरीखेड़ा गांव अवैध शराब के धंधे के लिए बदनाम हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि लगातार कार्रवाई के चलते कई महीने से उपरोक्त गांवों में शराब का धंधा पूरी तरह से बंद हो चुका है। पुलिस ने बीते एक वर्ष में कच्ची शराब बनाने और बेचने वाले 119 लोगों को गिरफ्तार कर 1550 लीटर कच्ची शराब जब्त की और 31 भट्ठियां नष्ट कीं। कई लोगों पर गैंगस्टर भी लगाया गया है।