क्लीनिकल ट्रायल में अवैध प्रैक्टिस अब नहीं चलेगी। 2015 के बाद क्लीनिकल ट्रायल सिर्फ मानक पूरे करने वाले चिकित्सा संस्थान ही कर पाएंगे। भारत सरकार की क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) के नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स से मान्यता जरूरी होगी।
इसके साथ ही किसी भी मरीज पर क्लीनिकल ट्रायल करने से पहले वीडियो कैमरे के सामने पूरी जानकारी देकर लिखित सहमति लेनी होगी। बुधवार को सीडीआरआई में नेशनल कोआर्डिनेटर फॉर फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम प्रो. वाईके गुप्ता ने यह जानकारी दी।
प्रो. गुप्ता का कहना था कि एनएबीएच ने मान्यता के मानकों पर अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें क्लीनिकल ट्रायल के लिए ड्रग रिसर्च सेंटर, हॉस्पिटल या मेडिकल कॉलेज को मान्यता के साथ उसकी एथिक्स कमेटी को भी रजिस्टर्ड कराना जरूरी होगा। प्रो. गुप्ता ने बताया कि डॉ. चौधरी समिति ने 25 बिंदुओं पर अपनी सिफारिश दी थी।