लखनऊ के इंदिरानगर और चौक में वायु प्रदूषण लगातार दूसरे साल भी लखनऊ में सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। सीएसआईआर की लैब इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) की प्री-मानसून रिपोर्ट के मुताबिक, आवासीय इलाकों में इंदिरानगर की हवा सबसे ज्यादा जहरीली है।
2016 में भी यहां हवा सबसे अधिक प्रदूषित थी। इसके अलावा चौक में भी हवा कॉमर्शियल इलाकों में सबसे अधिक प्रदूषित पाई गई। पिछले साल भी यहां हवा सबसे अधिक जहरीली थी। प्रदूषण बढ़ने का कारण यहां वाहनों का धुआं, नए निर्माण और मेट्रो का काम माना जा रहा है।
पिछले साल की तुलना में दोनों ही जगह प्रदूषण के प्रमुख कारण सूक्ष्मकण पीएम-10 का औसत लेवल बढ़ा हुआ मिला है। पिछले साल की प्री-मानसून रिपोर्ट में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले सूक्ष्म कणों यानी पीएम-10 का लेवल इंदिरानगर 221.5 तो चौक में 276.7 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर मिला था।
इस साल की प्री-मानसून रिपोर्ट में यह अब बढ़कर क्रमश: 240.8 और 310.6 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानक 50 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर से यह आंकड़ा करीब 5-6 गुना तक अधिक है।
पीएम-10 से भी खतरनाक माने जाने वाले सूक्ष्म कण पीएम-2.5 का लेवल भी पिछले साल की तुलना में बढ़ा है। इस साल यह क्रमश: 124.1 और 127.5 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर है।
तीन साल: इस तरह बढ़ा हवा में जहर
गाड़ियों की भरमार
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विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर आईआईटीआर के निदेशक डॉ. आलोक धवन ने प्री-मानसून रिपोर्ट को ऑनलाइन रिलीज किया। डॉ. धवन का कहना है कि आईआईटीआर की यह रिपोर्ट शहर के नौ इलाकों में अप्रैल-मई में लिए गए नमूनों की जांच के बाद आए प्रदूषण के आंकड़ों पर आधारित है।
इन नौ इलाकों में चार आवासीय (अलीगंज, विकासनगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर), चार कॉमर्शियल (चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक) और एक इंडस्ट्रियल एरिया अमौसी को चुना गया। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी जगह पीएम10 और पीएम2.5 का लेवल हवा में डब्ल्यूएचओ और नैक्स के मानकों से अधिक मिला है।
2015 से लेकर 2017 तक इस तरह बढ़ा हवा में जहर
रिहाइशी इलाकों में गोमतीनगर दूसरे पायदान पर
क्षेत्र पीएम10 औसत पीएम2.5 औसत
इंदिरानगर 197.5/221.5/240.8 100.9/115.1/124.1
गोमतीनगर 183.2/204.6/ 83.6/99.9/108.4
अलीगंज 171.6/193.2/228.7 76.8/99.5/103.9
विकासनगर 177.5/186.1/193.6 98.7/88.7/93.4
कॉमर्शियल इलाकों में ये हाल
ऐसे रहते हैं हालात
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कॉमर्शियल इलाकों में ये हाल
चौक 209.1/276.7/310.6 95.4/114.3/127.5
चारबाग 240.9/230.9/242.5 116.5/119.2/122.3
आलमबाग 224.8/209.4/189.2 114.8/104.7/98.5
अमीनाबाद 174.7/203.3/196.4 92.3/102.6/109.7
इंडस्ट्रियल
अमौसी 199.4/238.3/210.1 96.9/111.3/127.5
(सभी आंकडे़ 2015/2016/2017 के रूप में तुलनात्मक रूप से दिए गए हैं)
ये है मानक : पीएम10 का राष्ट्रीय मानक नैक्स 100 और डब्ल्यूएचओ का 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। वहीं पीएम2.5 का मानक नैक्स का 40 और डब्ल्यूएचओ का 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है। आईआईटीआर ने पहली बार पीएम2.5 की मॉनिटरिंग 2015 से शुरू की है।
‘इंदिरानगर में जहां कंस्ट्रक्शन गतिविधियां ज्यादा हैं, वहीं चौक में वाहनों की संख्या बढ़ी है। दोनों ही जगह प्रदूषण बढ़ने के कारण साफ हैं। इसके अलावा हमने अब अल्ट्राफाइन कणों पर रिसर्च शुरू किया है। इससे आने वाले सालों में पता चल सकेगा कि तकनीक को बेहतर करने के बाद वायु प्रदूषण का खतरा किस तरह बदल रहा है।’ - डॉ. एससी बर्मन, एचओडी, एनवायरमेंटल डिवीजन, आईआईटीआर