इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग (ईआई) के छात्र शक्ति पाठक ने अपनी ब्रांच में देशभर में ऑल इंडिया रैंक-03 व रिया ने 10वीं रैंक प्राप्त की है। इसके साथ ही इसी ब्रांच में उज्मा हसन में 19वीं, नीलेश चंद ने 42वीं, सुधांशु पाठक को 75वीं, विकास कुमार को 134वीं, मो. सैफ को 249वीं, आशीष कुमार को 288वीं रैंक मिली है।
इसके साथ ही यहां के केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र प्रशांत यादव को 51वीं, चिरंजीव को 470वीं, केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र शिवम देव को 36वीं, सिविल इंजीनियरिंग की राधा अग्रवाल को 41वीं रैंक मिली है।
उक्त के साथ ही आईआईटी, एनआईटी, और इंजीनियरिंग कॉलेजों में एमटेक में दाखिले व पब्लिक सेक्टर कंपनी (पीएसयू) में नौकरी के लिए आयोजित ग्रेजुएट एप्टीट्यूट टेस्ट फॉर इंजीनियरिंग (गेट) में राजधानी के विद्यार्थियों ने सफलता पाई है।
खास ये कि इसमें काफी छात्र किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी बिना किसी रुकावट के बिना कोचिंग के तैयारी की और सफलता पाई। अब उनका लक्ष्य किसी अच्छे पीएसयू में नौकरी पाना है। गौरतलब है कि शुक्रवार शाम को आईआईटी दिल्ली द्वारा गेट का परिणाम जारी किया गया है।
शक्ति पाठक, ऑल इंडिया रैंक 03
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग से बीटेक फाइनल कर रहा हूं। मैंने पहले प्रयास में सफलता पाई है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए पढ़ाई कंसंट्रेट होकर करें। एक समय में कई लक्ष्य नहीं साधने चाहिए। पीएसयू में जॉब करूंगा और अच्छी आईआईटी में मौका मिला तो एमटेक करूंगा। पिता शरद चंद्र पाठक पूर्व आर्मी मैन व मां कुसुमलता पाठक गृहणी हैं। मेरी सफलता में परिवार व शिक्षकों का योगदान है।
गौरम धामा, आल इंडिया रैंक 100
मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक फाइनल ईयर का छात्र हूं। मेरा पहला प्रयास है। पिता सुमेर सिंह धामा किसान हैं। उन्होंने मेरी पढ़ाई में बहुत सहयोग व मार्गदर्शन किया। किसी अच्छे पीएसयू ओएनजीसी, आईओसी, पावर ग्रिड में जॉब करके अपने परिवारीजनों को बेहतर सुविधा देना चाहता हूं। गेट की तैयारी के लिए घंटे नहीं नियमित और प्रतिबद्धता से तैयारी करनी चाहिए।
दिव्य प्रताप, आल इंडिया रैंक 156
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से 2019 में बीटेक पास आउट हूं। मैंने बिना कोचिंग किए, खुद से तैयारी की है। हमें सही रणनीति से तैयारी करनी चाहिए। मैंने 6 से 8 महीने की तैयारी में ही सफलता पाई है। पिता राम बहादुर सिंह किसान व मां संतोष देवी गृहणी हैं। मेरी सफलता में सबसे बड़ा योगदान परिवार का है। पीएसयू में जाकर जॉब करना चाहता हूं। गवर्नमेंट सेक्टर में जाने का भी प्रयास करूंगा।
दीप्ति त्रिपाठी, ऑल इंडिया रैंक 165
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक फाइनल ईयर की स्टूडेंट हूं। मैं पीएसयू में जॉब के साथ आईएससी बंगलौर से एमटेक करना चाहती हूं। आगे मौका मिला तो सिविल सर्विस की तैयारी भी करूंगी। हमें गेट में सफलता पाने के लिए सकारात्मक रहकर तैयारी करनी चाहिए। पढ़ाई में क्वालिटी चाहिए क्वांटिटी नहीं। 6 से 8 घंटे की नियमित तैयारी भी सफलता दिला सकती है। पिता डीएवी कॉलेज देहरादून में लैब असिस्टेंट व मां विजय लक्ष्मी गृहणी हैं।