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डॉक्टरों की संवेदनहीनता हुई उजागर, मां की मौत के बाद भी बेटे से दबवाते रहे एंबुबैग

Mon, 24 Jun 2019 04:32 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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मां को जिंदा समझकर बेटा दबवाता रहा एंबुबेग - फोटो : अमर उजाला
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 केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में एक बार फिर डॉक्टरों की संवेदनहीनता सामने आई। महिला की मौत के बाद डॉक्टर एंबुबैग से उसे सांस दिलवाते रहे। तीमारदार के विरोध पर डॉक्टर आधे घंटे बाद पहुंचे और जांच के बाद मृत घोषित किया। तीमारदार का आरोप है कि मरीज सांसें थम चुकी थीं। शरीर भी ठंडा पड़ने लगा था।

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कोई भी हरकत नहीं थी, इसके बावजूद डॉक्टर एंबुबैग से कृत्रिम सांसें दिलवा रहे थे। अमेठी के खरावां निवासी धनराजा (55) लकवा मार गया था। उसे झटके आ रहे थे। रविवार सुबह डॉक्टरों की सलाह पर बेटा वासुदेव मां धनराजा को लेकर दोपहर डेढ़ बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचा।

कैजुअल्टी में भीड़ होने पर गार्डों ने स्ट्रेचर बाहर रुकवा दी। काफी देर बाद मरीज को अंदर ले जाया गया। इस दौरान डॉक्टर ने धनराजा को एंबुबैग लगा दिया। बेटा विश्वास से एंबुबैग दबाने को कहा। करीब दो बजे महिला मरीज की सांसें थमने के साथ शरीर में कोई हरकत नहीं दिखी।

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शिकायत मिलने पर कराई जाएगी जांच

मरीज धनराजा - फोटो : अमर उजाला
बेटे का कहना है कि कैजुअल्टी में डॉक्टरों से मरीज को देखने को कहा तो वे एंबुबैग दबाने की बात कहकर चले गए। सांसें न चलता देख बेटे ने विरोध जताया। करीब ढाई बजे डॉक्टर ने धनराजा को मृत घोषित किया। बेटे का आरोप है कि मौत के बाद भी डॉक्टर स्ट्रेचर पर मां को लेटाकर एंबुबैग दबवा रहे थे।

केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने ऐसा संभव नहीं है कि मौत बाद भी डॉक्टर तीमारदारों से एंबुबैग से कृत्रिम सांस दिलवाए। शिकायत मिलती है तो जांच कराई जाएगी।
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