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गजब! अकेले यूपी में चीन से ज्यादा असलहे

Mon, 22 Sep 2014 06:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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आत्मरक्षा के नाम पर लाइसेंसी असलहा के साथ अब रसूख जुड़ चुका है। स्टेटस सिंबल के नाम पर हथियार रखने की भूख किस कदर बढ़ी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रसूखदारों के पास पुलिस से पांच गुना ज्यादा असहले हैं।
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सूबे में पुलिस के पास 2.25 लाख तो रसूखदारों के पास आत्मरक्षा के नाम पर 11.22 लाख लाइसेंसी असलहे हैं। बिना लाइसेंस वाले हथियारों का तो आंकड़ा भी सही-सही उपलब्ध नहीं है।

आत्मरक्षा के बहाने हर्ष फायरिंग और लाइसेंसी असलहों पर यह चौंकाने वाली रिपोर्ट है भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की। यूपी सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद आईआईएम के प्रोफेसर रहे डॉ. हिमांशु राय से यह अध्ययन करवाया। इस रिपोर्ट को हाईकोर्ट को सौंपा दिया गया है।
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हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार ने उनकी राय भी मांगी है। रिपोर्ट के आंकड़े इशारा करते हैं कि असलहों के बूते समाज में रौब गांठना और दबदबा कायम करना उद्देश्य हो गया है। पाबंदी के वावजूद हर्ष फायरिंग आम है, भले ही इसमें निर्दोष लोग लगातार मारे जा रहे हों।

इन 3 सवालों ने खोली हकीकत

पहला: आम नागरिक असलहों के प्रदर्शन पर क्या सोचता है?
रिपोर्ट: कोई भी नागरिक भौड़े प्रदर्शन को पसंद नहीं करता।
99 फीसदी लोग चाहते हैं कि हर्ष फायरिंग करने वालों पर सीधी व सख्त कार्रवाई हो।

दूसरा: असहलाधारी की क्या दलील है?
रिपोर्ट: आत्मरक्षा के लिए जरूरी है। ... लेकिन हकीकत यह है कि सुरक्षा की दुहाई देकर असलहों का लाइसेंस लेने वालों को पूरे साल एक भी धमकी नहीं मिली।

तीसरा: पुलिस क्या चाहती है?
रिपोर्ट: असलहा रखने वाले रसूखदारों पर कानून की सख्ती व नियंत्रण बढ़े।

हैरान कर देगा ये तथ्य

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि 20 करोड़ की आबादी वाले यूपी में 11.22 लाख लाइसेंसी असलहे हैं। वहीं 136 करोड़ की आबादी वाले चीनियों के पास केवल 6.8 लाख असलहे हैं। 25 करोड़ की आबादी वाले इंडोनेशिया में 34 हजार लाइसेंसी असलहे हैं। 16 करोड़ की आबादी वाले बांग्लादेश के पास 1.85 लाख और 12 करोड़ की आबादी वाले जापान के पास 4.13 लाख लाइसेंसी असलहा है।

शायद यही वजह है कि अध्ययन में शामिल 605 में से 533 आम नागरिकों ने कहा कि असलहा लाइसेंस खुद की सुरक्षा चाहने वालों को दिए जाएंगे। 38 ने आत्मरक्षा की जरूरत महसूस करने वालों को देने की बात कही। 13 ने कहा कि नागरिकों को लाइसेंस और हथियार कतई न दिए जाएं।

86 फीसदी पुलिसकर्मियों के मुताबिक लाइसेंस मिलने के बाद असलहे का दुरुपयोग किया जाता है। साथ ही 45 प्रतिशत चाहते हैं कि लाइसेंस असलहों कम रखी जानी चाहिए, तो 81 फीसदी के अनुसार एक ही परिवार में दिए जाने वाले लाइसेंस की संख्या सीमित की जानी चाहिए।

63 लाख पूरे देश में, 11 लाख असलहे यूपी में

हर्ष फायरिंग पर आईआईएम की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि यूपी के लोगों में खुद को रसूखदार दिखाने के लिए असलहे रखने का जुनून सा है। यह जुनून इस कदर हावी है कि देश में मौजूद 63 लाख असलहों में से 11 लाख से अधिक अकेले प्रदेश में है।

आईआईएम लखनऊ के प्रो. हिमांशु राय अपनी रिपोर्ट में बताते हैं कि देश में सर्वाधिक लाइसेंसी गन रखने वाले नागरिकों वाले शहरों की सूची में तीनों टॉप स्थान यूपी के शहरों के हैं।

लखनऊ 48 हजार के आंकड़े के साथ सबसे ऊपर है। यहां तो लाइसेंस के 50 हजार नए आवेदन भी लंबित हैं। इसके बाद बरेली (46 हजार लाइसेंसी हथियार) और आगरा (43 हजार लाइसेंसी हथियार) हैं।

IIM ने अपनी रिपोर्ट में जो सुझाव दिए

1. राइफल एक असॉल्ट वेपन या हमला करने में उपयोग होने वाला असलहा है। इसका और लंबी बैरल वाली गन का लाइसेंस किसी को न दिया जाए।
2. आत्मरक्षा के लिए कम कैलिबर की बंदूकें दी जा सकती हैं, जिनसे किसी की मौत न हो, लेकिन सुरक्षा संभव हो।
3. लाइसेंस रखने वालों पर पुलिस गहन निगरानी रखे।
4. निकटवर्ती पुलिस स्टेशनों में लाइसेंसों की समय-समय पर जांच हो, ताकि उनका दुरुपयोग रुके।
5. नागरिकों को दिए असलहों की संख्या पुलिस के पास उपलब्ध असलहों की संख्या से कभी अधिक न हो।

खतरे जानते हैं नागरिक

90 फीसदी नागरिकों के अनुसार हर्ष फायरिंग से संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है। 94 फीसदी ने माना कि इससे किसी निर्दोष की जान भी जा सकती है या कोई घायल हो सकता है। हालांकि सार्वजनिक स्थलों पर असलहा लेकर आने वालों की पहचान के लिए मेटल डिटेक्टर लगाने से बात बनेगी, इससे 65 प्रतिशत लोग आश्वस्त नहीं दिखे। 35 प्रतिशत केअनुसार यह कारगर रहेगा।

94 प्रतिशत नागरिकों ने माना कि लंबे बैरल की गन से सार्वजनिक स्थानों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इनमें से 32 प्रतिशत ने कहा कि ये छोटे असलहों की तुलना में निश्चित तौर पर ज्यादा बुरा असर डालती है।

82 प्रतिशत लाइसेंस धारियों ने बताया कि वे ज्यादातर समय असलहा अपने साथ लेकर नहीं चलते। हालांकि लाइसेंस लेते समय इन सभी ने आत्मरक्षा के लिए गन की जरूरत बताई थी। वहीं अपना असलहा सार्वजनिक स्थानों पर जाने वाले 22 प्रतिशत थे।

76 फीसदी के लिए कूल ह GUN

38 प्रतिशत असलहाधारियों ने कहा कि एक भरी हुई गन अपने हाथ में होने पर वे रोमांचित महसूस करते हैं। वहीं 58 प्रतिशत इस बारे में कुछ कह नहीं सके। केवल 4 प्रतिशत ने इससे इन्कार किया। इससे भी आगे, जेब में असलहा रख सड़क पर चलना 76 प्रतिशत की नजर में ‘कूल’ है। केवल 4 प्रतिशत ने इससे इन्कार किया।

98 प्रतिशत ने माना कि गन होने से वे आत्मसम्मान को बढ़ा हुआ महसूस करते हैं। सीधे तौर पर वे हथियार को अपने लिए सम्मान का विषय मान रहे हैं। 64 प्रतिशत ने बताया कि अगर वे अपनी असलहा साथ रखें तो वे मानते हैं कि कोई उनसे हाथापाई करने की हिम्मत नहीं करेगा।

गोली चलाई या शादी में ले गए, यह ‘याद नहीं’

अपना लाइसेंसी असलहा शादियों या किसी पारिवारक समारोह में ले जाने की बात पर 57 फीसदी ने कहा कि उन्हें याद नहीं। वहीं 39 प्रतिशत ने इससे साफ इन्कार किया। 22 फीसदी को याद नहीं कि दिवाली या ईद के समय उन्होंने इनका उपयोग किया। 76 फीसदी इससे इन्कार करते हैं। कभी किसी पर गोली चलाने की बात से 98 प्रतिशत ने इन्कार किया तो बाकी 2 प्रतिशत को यह भी ‘याद नहीं’ था। यह इशारा करती है कि हर्ष फायरिंग में लाइसेंसी असलहों का किस स्तर पर उपयोग किया जाता है।

उधर, 80 प्रतिशत पुलिसकर्मी मानते हैं कि नागरिकों को हथियार लाइसेंस दिए जाने चाहिए। जबकि 20 प्रतिशत इसके पक्ष में नहीं हैं। लाइसेंस देने का अधिकार पुलिस चाहती है कि उसे दिए जाए। 31 प्रतिशत ने इस पर सहमति जताई। 96 प्रतिशत चाहते हैं कि लाइसेंस धारकों को सीमित मात्रा में बुलेट दी जाएं।

साथ ही, सार्वजनिक स्थलों पर असलहा लाने वालों पर रोक के लिए 44 फीसदी सहमत थे। वहीं 58 फीसदी मानते हैं कि लंबे बैरल की गन से अन्य लोगों पर गलत असर होता है। 97 पुलिस कर्मी मानते हैं कि गन केवल आत्मरक्षा के लिए दी जाए।
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ये भी कुछ रोचक तथ्य

92 प्रतिशत लाइसेंस धारियों के अनुसार अगर उनकी गन का बैरल लंबा है तो लोगों को जबरदस्त प्रभाव डालता है।
99 प्रतिशत लाइसेंसधारी उधार वसूली के लिए बंदूक का उपयोग उचित नहीं मानते।
95 प्रतिशत ने बताया कि उन्हाेंने कभी किसी को धमकाने के लिए अपनी असलहे का उपयोग नहीं किया। 5 प्रतिशत ने ऐसा किया है।
83 फीसदी गन लाइसेंसधारी अपनी गन घर में रख रहे हैं तो 3 प्रतिशत कार्यालयों में। यात्रा के समय 36 फीसदी इसे अपने वाहन में रखते हैं तो 46 फीसदी जेब में।
92 प्रतिशत पुलिसकर्मी इस पक्ष में हैं कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों की पृष्ठभूमि की गहन जांच की जानी चाहिए।
97 प्रतिशत पुलिसकर्मी चाहते हैं कि लाइसेंस पाने वालों को हथियार उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जाए।
99 प्रतिशत मानते हैं कि ऐसे लोगों की दिमागी और शारीरिक जांच भी होनी चाहिए।
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