गर्भावस्था के दौरान सिर दर्द, पैर में सूजन, धुंधला दिखाई देने और पेट दर्द की समस्या उच्च रक्तचाप के कारण हो सकती है। गर्भवती महिलाओं में उच्च रक्तचाप मातृ मृत्यु की सबसे बड़ी वजह है। ऐसे लक्षण मिलते ही महिला को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।
ये निष्कर्ष केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में मातृ मृत्यु के मामलों पर हुए अध्ययन में निकला है। इसे जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी ऑफ इंडिया में स्थान मिला है। अध्ययन में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा मेहरोत्रा, डॉ. वंदना सोलंकी और डॉ. नेहा चौधरी शामिल रहीं। विभाग में तीन साल के दौरान हुईं 326 मातृ मृत्यु के मामलों को अध्ययन में शामिल किया गया। इन 326 में से 52 मौतों की वजह गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप थी। यानी करीब 16 फीसदी मौतें उच्च रक्तचाप की वजह से हुई।
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ये लक्षण आएं तो हो जाएं सावधान
सिरदर्द, धुंधला दिखना, धब्बे नजर आना, पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ, हाथ-पैर व चेहरे में सूजन।
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समझें, क्या है गर्भावस्था का उच्च रक्तचाप
प्रो. सीमा मेहरोत्रा ने बताया कि गर्भावधि उच्च रक्तचाप वह स्थिति है, जब गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद उच्च रक्तचाप विकसित होता है। प्रसव के बाद उच्च रक्तचाप दोबारा सामान्य हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप बेहद खतरनाक हो सकता है। इसकी वजह से झटके आने शुरू हो सकते हैं, जिसे प्रीक्लेम्पसिया कहते हैं। इसमें कई अंग खराब होने और जान जाने का खतरा हो जाता है। स्पष्ट नहीं है कारण : डॉ. वंदना सोलंकी के मुताबिक, गर्भावधि उच्च रक्तचाप की स्पष्ट वजह अब भी अज्ञात है। हालांकि, पहली गर्भावस्था, 35 वर्ष से अधिक उम्र, मोटापा, मधुमेह, गुर्दे की बीमारी और उच्च रक्तचाप के पारिवारिक इतिहास को जोखिम के रूप में देखा जाता है।
75 फीसदी मौतें लक्षण पहचानने में देरी की वजह से
अध्ययन में कुल मौतों को तीन श्रेणियों में बांटा गया। पहली श्रेणी में लक्षण पहचानने में हुई देरी को रखा गया। दूसरी श्रेणी में परिवहन सुविधा की कमी और तीसरी श्रेणी में अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज शुरू होने में देरी और खराब देखभाल को रखा गया। कुल मौतों में 75 फीसदी पहली श्रेणी की ही थीं। 46.15 फीसदी मामलों में मौत की वजह दूसरी श्रेणी और 26.9 फीसदी मामलों में तीसरी श्रेणी वजह थी।