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Lucknow News: सावधानी बरती तो इस बार पटाखों ने कम झुलसाया

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लखनऊ। शहरवासियों ने दिवाली में बेहद सतर्कता से पटाखे जलाए। नतीजतन पिछले साल के मुकाबले इस दफा पटाखों से झुलसने वालों का आंकड़ा कम रहा। बीते साल करीब 200 लोग पटाखों से झुलसकर अस्पताल पहुंचे थे, इस दफा यह आंकड़ा 160 ही रहा।



सरकारी अस्पतालों में पहुंचे 160 में से 50 झुलसे लोगों को कुछ देर के लिए ही भर्ती करना पड़ा। इनमें से ज्यादातर के हाथ, चेहरे व सीने झुलसे थे। पांच लोगों के हाथों में पटाखे दग गए थे। कुछ घंटे बाद 42 झुलसे लोगों को डिस्चार्ज कर दिया गया। अभी आठ लोगों का इलाज चल रहा है।
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केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि दिवाली में झुलसने के कुल 23 मामले आए। इनमें से पांच को भर्ती किया गया है। राहत की बात है कि कोई भी गंभीर नहीं है। बाकी 18 को प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया गया।

सिविल अस्पताल पहुंचे 30 लोग

सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पटाखों से झुलसे 30 लोग पहुंचे। इनमें से 27 लोगों को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। तीन को बर्न यूनिट में भर्ती कर लिया गया। सीएमएस डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि भर्ती तीन लोगों में से दो 20 प्रतिशत से अधिक झुलसे हैं। दो हादसे शॉर्ट सर्किट से हुए जबकि एक पटाखा जलाते वक्त जख्मी हुआ था। इन सभी की हालत में सुधार है।



लोकबंधु में 29 को मिला इलाज

लोकबंधु अस्पताल में 29 झुलसे लोग पहुंचे। इनमें से तीन बच्चे पटाखे जलाते वक्त मामूली रूप से झुलसे थे। सात लोग दीया या फिर दूसरी वजह से झुलसे थे। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि सभी को इलाज मुहैया कराया गया।

बलरामपुर 25 तो 10 पहुंचे बीआरडी



बलरामपुर अस्पताल में दिवाली की रात 25 झुलसे लोग पहुंचे। किसी के चेहरे पर पटाखे जलाते वक्त चोट लगी तो किसी की आंख में। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि गंभीर रूप से झुलसा कोई नहीं आया। सभी का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों ने किया। महानगर भाऊराव देवरस अस्पताल की इमरजेंसी में 10 झुलसे लोग पहुंचे। इनमें से दो युवकों के हाथ में मामूली चोट आई थी।
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मामूली रूप से झुलसे 43 लोग पहुंचे लोहिया

लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में 43 लोग पहुंचे। ये सभी पटाखे से झुलसे थे। एक युवक का गला मामूली रूप से झुलस गया था। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि सभी को प्राथमिक इलाज मुहैया कराने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। किसी को भी भर्ती करने की नौबत नहीं आई।



पिछले तीन साल के आंकड़े

वर्ष - झुलसे जो अस्पताल पहुंचे



2022 - 150

2023 - 200

2024 - 160
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