लखनऊ। लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन ने शून्य मृत्युदर की ओर: सड़क सुरक्षा और शहरी यातायात प्रबंधन का रूपांतरण विषय पर बुधवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें परिवहन आयुक्त बीएन सिंह ने कहा कि सीबीएसई व आईसीएसई में कक्षा छह से 12वीं तक के बच्चों को सड़क सुरक्षा के बारे में शिक्षा दी जाए। इससे सड़क सुरक्षा की दिशा में व्यापक सुधार आएगा।
परिवहन आयुक्त ने कहा कि हमारा दृष्टिकोण सरल है। हम डिजिटल सेवाओं, डाटा एनालिटिक्स और लक्षित प्रवर्तन से सड़क सुरक्षा और परिवहन प्रणाली को नए सिरे से परिभाषित कर रहे हैं। इससे प्रदेश में जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि डेढ़ लाख जन सुविधा केंद्रों से 45 फेसलेस सेवाएं शुरू की कई हैं, जिससे लोगों का समय बच रहा है। साइबर सिक्योर फेसलेस लर्निंग लाइसेंस की व्यवस्था की गई है।
व्हाट्सएप पर चालान की सूचना देने की व्यवस्था की जा रही है। 151 हेल्पलाइन का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस का प्रस्ताव भी भेजा गया है। एआई की मदद से सड़क सुरक्षा को और बेहतर बनाने का प्रयास हो रहा है।
उन्होंने कहा कि गलत चालान निरस्त करने की प्रणाली, व्हाट्सएप पर चालान भुगतान का रिमाइंडर, गोल्डन ऑवर प्लेटफॉर्म, गति प्रबंधन, दुर्घटना विश्लेषण और सुरक्षित कॉरिडोर की दिशा में काम किया जा रहा है।
सेवानिवृत्त आईपीएस राजेश पांडेय ने बताया कि एक्सप्रेसवे विकास प्राधिकरण हाईवे पर चालकों की नींद और आंख झपकने की स्थिति पहचानने के लिए एआई आधारित प्रणाली का पायलट प्रोजेक्ट चला रहा है। इससे हादसों को रोका जा सकेगा। कार्यक्रम में संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था बबलू कुमार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंग नाथ पांडे, एपेक्स ट्रॉमा सेंटर केजीएमयू के आईसीयू प्रभारी डॉ. प्रतीक सिंह और पूर्व मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडे ने भी अपने विचार रखे।