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Lucknow News: 200 रुपये खर्च कर देते तो बच जाता फहद की जान

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फहद की मौत।
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लखनऊ। शंकरपुरी कॉलोनी के पार्क में ट्रांसफार्मर पेटी के यार्ड में गेट की जाली काफी समय से टूटी थी। बिजली निगम को जाली लगाने के लिए महज 200 रुपये ही खर्च करने थे। स्थानीय लोगों का आरोप कि डेढ़ माह से वह इस जाली विहीन गेट को सही करने की मांग कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कर्मियों की लापरवाही की कीमत फहद को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
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सलमा आबिया, अब्दुल लतीफ, अब्दुल कलाम, मो. अतीक, युनूस रेहान ने बताया कि कॉलोनी में लगे ट्रांसफार्मर व पेटी पर खास जान पहचान वाले कर्मचारी काम करने आते हैं। उनसे कई बार टूटे गेट को सही कराने, कटे-पिटे तारों पर टेपिंग करने, अर्थ वायर को दुरुस्त करने की मांग की गई थी। सुनवाई न होने पर एक बार पत्र भी लिखा गया था। ऐसे में सवाल कि जब हादसे का अंदेशा जताते हुए कर्मचारियों से टूटी जाली को सही कराने की मांग की गई थी, फिर भी समस्या की अनदेखी क्यों हुई। लोगों का कहना कि कर्मचारी जब भी बंद बिजली को चालू करने आते हैं, तब-तब तारों को बेतरतीब फैलाकर चले जाते। तारों को व्यवस्थित करने के लिए भी कई बार कहा गया, लेकिन इस मामले में भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
20 मवेशियों की हो चुकी मौत

कॉलोनी के लोगों ने बताया कि उनके इलाके में एक साल के भीतर खुले गेट व कटे तारों और पोल में उतरे करंट से 20 मवेशियों की मौत हो चुकी है। करीब 10 बकरियां, 8 कुत्ते व 2 गाय अपनी जान गंवा चुके हैं। बारिश होने पर पोल व अर्थिंग के तारों में करंट उतर आता है। कई बार राहगीर भी झटके खा चुके हैं। इन मवेशियों की मौत के लिए भी बिजली निगम के कर्मचारी ही जिम्मेदार हैं।
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हर किसे के काम का पार्क
शंकरपुरी कॉलोनी का पार्क हर किसे के काम का है। यहां पर रोज के कमाने-खाने वाले रहते हैं। इनकी कमाई का जरिया ऑटो व वैन संचालन है। पार्क के एक कोने में बिजली आपूर्ति का सिस्टम और किनारे-किनारे वाहन खड़े होते हैं। बीच में जो जगह बचती हैं, उसमें बच्चे खेलते हैं।
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फहद की मौत।

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