कोई घूरे या छेड़े तो मुंहतोड़ जवाब दें, हम आपके साथ : एडीजी यूपी रेणुका मिश्रा
मिशन शक्ति की शुरुआत हो चुकी है। अब वक्त है हम सब अपनी जिम्मेदारी को समझें और उन्हें निभाएं। अपराध को नजरअंदाज करके आगे बढ़ जाने, जाने दो...क्या फर्क पड़ता है... जैसा सोचने की आदतें छोड़ें।
राजधानी की, लखनऊ की हर बेटी से मेरा यह कहना है कि कोई जब पहली बार आपको घूरे, छेड़े तो उसका तुरंत विरोध करें, मुंहतोड़ जवाब दें। आप पुलिस को हर कदम पर साथ पाएंगी।
महिला अपराध के खिलाफ सख्त से सख्त और त्वरित एक्शन का यह भरोसा एडीजी यूपी और लखनऊ में मिशन शक्ति अभियान की नोडल अधिकारी रेणुका मिश्रा ने दिलया।
सोमवार को मिशन शक्ति अभियान के तहत लखनऊ पुलिस व अमर उजाला की ओर से आयोजित वेबिनार में उन्होंने ये बातें कहीं।
अपराध को सामाजिक कहकर गंभीरता कम न करें
एडीजी ने कहा, यदि किसी अपराध को सामाजिक बताकर हम समाज के दायित्व की याद दिलाते हैं, ठोस कदम उठाने का साहस करते हैं तो सही है। हालांकि, हो इससे उलट रहा है, क्योंकि अपराध को सामाजिक का जामा पहनाकर उसकी गंभीरता कम कर दी जाती है। यही वजह है कि आज छेड़खानी हो, घूरना हो या फिर कोई अपराध, लोगों ने इसे सामान्य मान लिया है। बचकर निकल जाना, कुछ न कहना, बेटियों को रास्ता बदल देने के लिए कह देना जैसी सलाह अपराध को सामान्य प्रक्रिया मानने की वजह से है। हमें इसी सोच को बदलना है।
शिकायत लेकर आने वाली पीड़िता के प्रति रवैया गलत
एडीजी ने कहा कि पुलिस भी इसी समाज का हिस्सा है। जाने दो या शिकायत लेकर आने वाली पीड़िता की बातें अनसुना कर देना, हल्के में लेना या उसे ही अविश्वास की नजर से देखना जैसे रवैये की शिकायतें मिलती हैं। वर्दी पहनने वाले हर व्यक्ति को कानून की नजरिये से देखना है अपराध को, पीड़िता के प्रति रवैया सुधारना होगा।
बेटियां क्यों डरकर जिएं, घटनाओं का कारण उनके कपड़े नहीं
एडीजी ने कहा कि जितना जरूरी है बेटियों में आत्मविश्वास लाना, उतना जरूरी है बेटों को यह शिक्षित करना कि वे ऐसा करेंगे तो यह अपराध है। कभी सेल्फ डिफेंस तो कभी आत्मविश्वास के नाम पर लड़कियों को डराना नहीं चाहिए, बल्कि हम यह क्यों नहीं सोचते कि बेटियों को डर-डरकर क्यों जीना पड़े, बेटे क्यों नहीं डरें। मेरा हर बेटी से यह कहना है कि अपराध का कारण उनके कपड़े नहीं हैं। हमें बेटों की सोच बदलनी है।