प्रवेंद्र गुप्ता
दो बच्चों से अधिक होने पर नगर निगम चुनाव लड़ने से रोक वाले प्रदेश सरकार की जनसंख्या नीति के ड्राफ्ट ने अगर बिना संशोधन कानूनी रूप ले लिया तो महापौर सहित आधे पार्षद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
निगम के 118 सदस्यीय सदन में करीब पचास प्रतिशत पार्षद ऐसे हैं, जिनके दो बच्चों से अधिक हैं। नगर निगम चुनाव करीब डेढ़ साल बाद है, मगर ड्राफ्ट के आने से पार्षदों की बेचैनी बढ़ गई है।
इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि बिल लागू हुआ तो अगले चुनाव में कौन-कौन मैदान से बाहर हो जाएगा। जिनका नाम चर्चा में हैं। उनमें शहर की प्रथम नागरिक और महापौर संयुक्ता भाटिया भी हैं। उनके तीन बच्चे हैं। दो बेटियां और एक बेटा।
इसी तरह नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रजनीश गुप्ता भी बिल लागू होने पर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे क्योंकि उनके भी तीन बच्चे हैं। छह बार पार्षद का चुनाव जीत चुके भाजपा के नागेंद्र सिंह चौहान भी चुनावी रेस से बाहर हो जाएंगे क्योंकि उनके भी तीन बच्चे हैं।
इसी तरह भाजपा से कई बार पार्षद बन रहे अरुण तिवारी भी तीन बच्चे होने के चलते ड्राफ्ट से प्रभावित हो रहे हैं।
महाकवि जयशंकर प्रसाद वार्ड से लगातार एक ही परिवार का कब्जा है। जब पुरुष सीट होती है तो सुरेश अवस्थी चुनाव जीतते हैं और जब महिला होती है तो उनकी पत्नी गीता अवस्थी जीत रही हैं।
पर अब ड्राफ्ट के चलते वह भी चुनावी दौड़ से बाहर हो जाएंगे। चौथी बार पार्षद बनने वाले त्रिवेणी नगर वार्ड के पार्षद मुन्ना मिश्रा भी तीन बच्चों के चलते अगली बार चुनावी रेस से बाहर हो सकते हैं।
सपा, कांग्रेस को राहत, भाजपा पार्षद दल नेता प्रभावित
सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू को राहत है क्योंकि उनके दो बच्चे हैं। वहीं कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी को भी राहत है क्योंकि उनका एक बच्चा है, मगर भाजपा पार्षद दल के नेता कौशलेंद्र द्विवेदी पर असर पड़ेगा क्योंकि उनके तीन बच्चे हैं।
सवित्री, सलीम, चांद और संजय के चार से छह बच्चे
बेगम हजरत महज बजरंग बली वार्ड से पार्षद मोहम्मद सलीम के पांच बच्चे हैं। जानकीपुरम प्रथम वार्ड की पार्षद शीबा चांद सिद्दीकी के चार बच्चे हैं। चिनहट द्वितीय वार्ड की पार्षद सवित्री देवी के छह बच्चे हैं। राजीव गांधी वार्ड के पार्षद संजय राठौर के चार बच्चे हैं। ऐसे में यह सभी पार्षद सीट बचाने के लिए अभी से विकल्प की तलाश में लग गए हैं।
यह कुंवारे पार्षद निश्चिंत
नगर निगम सदन में कई पार्षद कुंवारे भी हैं। ऐसे में जनसंख्या नीति ड्राफ्ट लागू होने पर भी उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे पार्षदों में भाजपा के पूर्व नेता पार्षद दल और मौजूदा एलडीए बोर्ड सदस्य रामकृष्ण यादव, इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के पार्षद समीर पाल सोनू, अलीगंज वार्ड के पार्षद पृथ्वी गुप्ता और मौलवीगंज वार्ड के पार्षद मुकेश सिंह मोंटी प्रमुख हैं।
कई पंचायत प्रतिनिधियों का भविष्य भी पड़ सकता है खतरे में
अलग-अलग ब्लॉक की बात करें तो काकोरी में नव निर्वाचित ब्लॉक प्रमुख नीतू यादव के दो बेटे व एक बेटी है। जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र कुमार उर्फ गुड्डू यादव के तीन बेटी व एक बेटा और पन्ना लाल रावत के दो बेटे व एक बेटी है। वहीं, कई प्रधान ऐसे हैं, जिनकी दो से अधिक संतानें हैं। उदाहरण के तौर पर प्रधान यदुनाथ गौतम के छह बेटे व दो बेटी, राम विलास यादव के दो बेटी व तीन बेटे और राजकुमार यादव के चार बेटे व एक बेटी है। इसी तरह गोसाईंगंज में ब्लॉक प्रमुख विनय वर्मा के तीन बेटियां हैं। माल में नवनिर्वाचित ब्लाक प्रमुख रामदेवी के तीन बेटियां व एक बेटा है। इसी तरह जिपं सदस्य रामप्यारी के दो बेटियां व एक बेटा, संतोष कुमारी के तीन बेटियां और निहाल अहमद के चार बेटियां व दो बेटे हैं।
वहीं, जानकारों की मानें तो माल में दो दर्जन ऐसे प्रधान हैं, जिनकी दो से अधिक संतानें हैं। उदाहरण के तौर पर प्रधान रामकुमार के दो बेटियां, एक बेटा, संतोष कुमार के दो बेटियां, एक बेटा, मालती देवी के तीन बेटियां, एक बेटा, सुषमा के तीन बेटियां, दो बेटे और प्रधान मालती देवी के पांच बेटियां, तीन बेटे हैं। इसी तरह प्रधान राजेंद्र मौर्य के दो बेटे एक बेटी है। मोहनलालगंज में भी बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों के लिए नई नीति रोड़ा बन सकती है। सरोजनी नगर में जनप्रतिनिधियों ने कम से कम तीन संतानों तक की छूट देने की जरूरत बतायी। वर्तमान में यहां जिपं सदस्य किरन सिंह के तीन संतानों में दो लड़के और एक बेटी है। प्रधान संतोष यादव, रघुवीर यादव के चार-चार संतानें हैं। प्रधान रमेश गुप्ता के दो बेटे और दो बेटियां, संगीता यादव के तीन संतानें हैं।