लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने यहां चल रहे स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों पर सख्ती की है। बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. एसपी सिंह की अध्यक्षता में हुई वित्त समिति की बैठक में तय हुआ कि इन कोर्सों की आय का 60 फीसदी उनके संचालन व 40 प्रतिशत विवि के विकास पर खर्च होगा। वहीं, जिन कोर्सों में सीट के सापेक्ष 60 फीसदी से कम दाखिले होंगे, उस सत्र में कोर्स में प्रवेश नहीं लिया जाएगा। निर्णय सत्र 2019-20 से प्रभावी होगा। इसके साथ ही वित्त समिति ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 32.32 करोड़ के घाटे वाले 199.68 करोड़ के बजट पर भी मुहर लगा दी।
विवि में 59 स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम चल रहे हैं। इसमें से अधिकतर विभिन्न विभागों में ही चलते हैं। अभी तक के नियम अनुसार जिस कोर्स में सीट के सापेक्ष 40 फीसदी दाखिले नहीं होते थे, उस सत्र में वहां प्रवेश स्थगित कर दिया जाता था। अब इसे बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया गया है। वहीं, विश्वविद्यालय के संज्ञान में यह लाया गया है कि इन कोर्सों से होने वाली आय-व्यय का कोई लेखा-जोखा नहीं रहता है। इसका मनमाना प्रयोग हो रहा है। इसे देखते हुए स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की आय-व्यय का अलग से लेखा-जोखा तैयार कराया। बैठक में इस पर विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यों ने तय किया कि इन कोर्सों की आय का 60 फीसदी वेतन आदि पर खर्च होगा। बची आय विश्वविद्यालय को जाएगी, जिसका इस्तेमाल वह विकास पर कर सकेगा। बैठक में विवि की आय बढ़ाने के अन्य सुझावों पर भी चर्चा हुई।
जांची जाएगी कोर्सों की परफॉरमेंस
वित्त समिति ने तय किया कि स्ववित्तपोषित कोर्सों की परफॉरमेंस जांची जाएगी। देखा जाएगा कि किस कोर्स की मांग ज्यादा और किसकी कम है। सदस्यों को बताया गया कि कुछ कोर्स ऐसे भी हैं जिनकी आय कुछ नहीं और खर्च बहुत ज्यादा है। ऐसे में तय हुआ कि इन कोर्सों को लेकर सख्ती की जाएगी। जिन कोर्सों की मांग है, उसमें विद्यार्थियों को और बेहतर सुविधाएं-संसाधन देने का प्रयास होगा।
32.32 करोड़ के घाटे का बजट पास
वित्त समिति ने 199.68 करोड़ का बजट पास किया है। यह 32.32 करोड़ के घाटे का है। विश्वविद्यालय की कुल आय (शासन की ग्रांट मिलाकर) 167.67 करोड़ है। इसमें शासन से 44 करोड़ वेतन मद में, 4.84 करोड़ कंटीजेंसी मद में, 3.31 करोड़ अन्य मद में मिलते हैं। बाकी 115 करोड़ विश्वविद्यालय अपनी आय करता है। इसमें अधिकतर विद्यार्थियों से लिया जाने वाला शुल्क है। वहीं, व्यय में 143.8 करोड़ वेतन, 8.50 करोड़ बिजली बिल, एक करोड़ हाउस टैक्स, एक करोड़ वाटर टैक्स व परीक्षा आदि मद में खर्च होता है।
शिक्षकों को मिलेगा बढ़ा पारिश्रमिक
शिक्षकों को वित्त समिति ने थोड़ी और राहत दी है। शिक्षकों को मूल्यांकन, थीसिस जांचने, कंटीजेंसी मद, केंद्र अधीक्षक, केंद्र निरीक्षक आदि को दिए जाने वाले पारिश्रमिक में 35 से 40 फीसदी तक वृद्धि की है। इस पर सहमति आम चुनाव से पहले ही बन गई थी, जिसे समिति ने स्वीकार किया है। इसी क्रम में टीए-डीए आदि के नए शासनादेश को भी स्वीकार किया गया है। इससे शिक्षकों को लाभ मिलेगा।
शासन से मांगा जाएगा फंड
विवि का बजट 32.32 करोड़ रुपये के घाटे का है। शासन से मिलने वाली ग्रांट अपेक्षाकृत कम है। विवि की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलें, इसके लिए शासन से फंड की मांग होगी। स्ववित्तपोषित कोर्सों में 60 फीसदी दाखिले नहीं होंगे तो उस सत्र में प्रवेश नहीं लिया जाएगा। उनके खर्च आदि के विस्तृत नियमों पर मुहर लगी है।
एसके शुक्ला, रजिस्ट्रार, लविवि