व्यावसायिकता की कसौटी पर खरे स्टूडेंट्स तैयार करने के लिए शिक्षकों का अपडेट होना बहुत जरूरी है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षकों व पॉलीटेक्निक के लैब टेक्नीशियंस को इलेक्ट्रॉनिक्स व इंफॉर्मेशन कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का काम करेगा।
साथ ही टीचर्स के सॉफ्ट स्किल्स व बेसिक कम्युनिकेशन को विकसित करने पर काम होगा। टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए संस्थान में इलेक्ट्रानिक्स एंड आईसीटी एकेडमी बनाने की योजना है। प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्ताव मांगा गया था, जिसे संस्थान ने भेज दिया है। जल्द ही इस पर स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
संस्थान के निदेशक प्रो. एएस विद्यार्थी ने बताया कि सरकारी संस्थानों में तो फिर भी पीएचडी डिग्री धारक शिक्षकों की संख्या काफी है, लेकिन प्राइवेट संस्थानों में इनकी भारी कमी है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। अधिकतर शिक्षक समय के अनुसार खुद को अपडेट नहीं करते।
इसका खामियाजा भुगतते हैं स्टूडेंट्स। जहां छात्र को 10 प्रैक्टिकल कराने हों वहां मात्र 3-4 प्रैक्टिकल ही कराए जाते हैं। इससे छात्रों की एम्प्लॉयबिलिटी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
पीएचडी न होते हुए भी मिलेंगे अच्छे टीचर्स
विद्यार्थी के अनुसार इस एकेडमी में शिक्षकों व लैब टेक्नीशियन्स को टेक्निकल कंटेंट से जुड़ा प्रशिक्षण देने के अलावा उनके कोर्स के लिए अपडेट किया जाएगा। इससे वह छात्र-छात्राओं को बेहतर तरीके से पढ़ा सकेंगे।
दूसरा इस प्रशिक्षण के बाद पीएचडी न होते हुए भी शिक्षण संस्थानों को बेहतर शिक्षक मिलेंगे। यह प्रोजेक्ट यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालयों में स्थापित एकेडमिक स्टॉफ कॉलेज की तर्ज पर है।
चार साल में 16 हजार को प्रशिक्षण
चार साल के इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 30 करोड़ रुपये है। इसमें से साढ़े 17 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी। शेष 12 करोड़ रुपये एकेडमी से ही रिवेन्यू के रूप में जेनरेट किए जाएंगे। ये रिवेन्यू प्रशिक्षण के बदले मिलने वाली फीस से आएगा।
पहले साल में फंडिंग का 70 फीसदी और बचे हुए तीन साल में प्रत्येक वर्ष 10-10 फीसदी एकेडमी को केंद्र की ओर से दिया जाएगा। चार साल के दौरान 16 हजार शिक्षकों व लैब टेक्नीशियन्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
प्रो. विद्यार्थी ने बताया कि यूजीसी मानक के अनुसार दो सप्ताह की ट्रेनिंग का शुल्क 12,500 रुपये निर्धारित है। आईईटी में बनने वाली एकेडमी में इस शुल्क को लेकर कुछ राहत दी जाएगी।
सॉफ्ट स्किल की भी ट्रेनिंग
प्रो. विद्यार्थी के अनुसार आज बहुत से शिक्षक कक्षा में जाने के बाद बस लेक्चर देकर आ जाते हैं। उनके और छात्र के बीच संवाद की कमी होती है। इसे ध्यान में रखते हुए एकेडमी में सॉफ्ट स्किल और बेसिक कम्युनिकेशन का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इससे शिक्षक और छात्र के बीच बेहतर संबंध स्थापित होगा। दूसरा प्रशिक्षण के बाद शिक्षक छात्र-छात्राओं को प्लेसमेंट के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर पाएंगे।
आईईटी के निदेशक प्रो. एएस विद्यार्थी का कहना है कि प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव मांगा था, जो भेज दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही स्वीकृति मिल जाएगी।
एकेडमी को इसी साल स्थापित करने का प्रयास है। इसके शुरू होने से बेहतर शिक्षक तैयार होंगे, जिससे छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा। बेहतर पढ़ाई से रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे।