मुख्य कारीगर रंजीत मंडल बताते हैं कि अशोक सिंघल ने पहले ही कहा था कि जो मूर्तियां बने वह राम कथाकुंज के नाम पर हो। जब राममंदिर बन जाएगा तो उसके चारों तरफ 67 एकड़ जमीन में चारों तरफ यह मूर्तियां लगाई जाएंगी।
चंपत राय ने भी कहा है कि मूर्तियों का काम जल्द पूरा करना है क्योंकि समय नजदीक आ रहा है, हम लोग बाहर से भी कारीगर बुला रहे हैं और यह काम हमको जल्दी से जल्दी करना ही है। हमें छुट्टियां भी नहीं मिल रही हैं।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि 1991 में कल्याण सिंह सरकार ने राम जन्मभूमि न्यास को लगभग 43 एकड़ जमीन लीज पर दी थी। इसका उद्देश्य यही था कि वहां रामकुंज की स्थापना की जाए, लेकिन 1993 में केंद्र की सरकार ने उसका अधिग्रहण करके हमारी जो भावना थी कि वहां रामकुंज की स्थापना की जाए उसे धराशाई कर दिया। अब वर्तमान की सरकार आ गई है वर्तमान सरकार से हमें प्रेरणा मिली की शीघ्र ही राममंदिर का निर्माण होगा तो स्वाभाविक है की रामकथा कुंज को विकसित करने की योजना हमारे दिल में है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा का कहना है कि राम जन्मभूमि पर जब भव्य राममंदिर का निर्माण होगा तब स्वाभाविक है जो 67 एकड़ भूमि है जिसे अधिकृत किया गया है उसे सुसज्जित किया जाएगा। अगर काम तेज नही होगा तो हम समय से मूर्तियां दे नही पाएंगे, जो कारीगर हैं वह असम के हैं और शीघ्र ही उनके कुछ सहयोगी और बढ़ सकते हैं तो अगर मूर्तियां बन जाएंगी तो समय से लगाई जा सकेंगी।
रामकुंज में लगभग सवा सौ मूर्तियों की स्थापना होगी जिसमें अयोध्या के बालकांड से लेकर लंकाकांड तक की मूर्तियां बन रही हैं। यह काम जल्द ही पूर्ण हो जाएगा।