सूबे की अफसरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि वे एक ऐसे ही अफसर से घूस की रकम वापस दिला चुके हैं।
बोले, एक जानने वाले का काम था। वह अफसर के पास गया तो उसने रिश्वत ली। काम नहीं हुआ तो फोन पर जानने वाले ने शिकायत की।
जांच में बात सही निकली तो उस अफसर से घूस की रकम वापस कराई। पद से भी हटा दिया। पर, भलमनसाहत दिखाई और उसके खिलाफ कोई दूसरी सख्त कार्रवाई नहीं की।
आईएएस वीक के मौके पर शुक्रवार को विधानभवन के तिलक हॉल में सीएम वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में डीआईजी से ऊपर के पुलिस अफसर भी मौजूद थे।
अफसरशाही के काम के तौर-तरीकों का मुख्यमंत्री ने एक और उदाहरण दिया। उन्होंने बताया, राजधानी में टीले वाली मस्जिद के आसपास सात-आठ सौ मीटर दायरे में पर्यटन के लिहाज से विकास की जरूरत है।
काम सीधे जनता से जुड़ा है। अफसरों को कई बार कह चुका हूं, मगर इतना छोटा सा काम आज तक नहीं हुआ। इस दौरान अखिलेश ने अफसरों को चेताते हुए कहा कि फाइलों का लटकाने की आदत छोड़ दें।
निष्पक्ष काम करें, सियासत न करें अफसरमुख्यमंत्री ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अगले तीन महीने को बहुत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने अफसरों से निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ काम करने की अपील करते हुए राजनीति नहीं करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियों को सिर उठाने का मौका नहीं मिलना चाहिए। प्रदेश में माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि थाना स्तर पर अराजक तत्वों की सूची बनाकर कार्रवाई की जाए। सांप्रदायिक शक्तियां प्रदेश में सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें सफल न होने दें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल को समय-समय पर प्रशिक्षण देने के साथ ही आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाएगा। फिलहाल इन तीन महीनों में मौजूदा संसाधन से ही कार्य करने होंगे।
उन्होंने सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए विकास के एजेंडे पर गुणवत्ता व समयबद्ध तरीके से काम करने का निर्देश दिया। राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीनचंद्र वाजपेयी ने भी अधिकारियों को संबोधित किया।