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आईएएस यूपी काडर के पुनर्गठन की तैयारी, पद बढ़ने के आसार

Sun, 07 Jul 2019 12:57 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आईएएस (प्रतीकात्मक)
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भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के यूपी काडर का नए सिरे से पुनर्गठन होगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए प्रदेश सरकार से प्रस्ताव मांगा है। शासन के नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने सभी विभागों से औचित्य के साथ प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है। पिछली बार की तरह इस बार भी कई पद बढ़ सकते हैं।
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केंद्र सरकार आम तौर पर लगभग हर पांच वर्ष पर आईएएस संवर्ग का काडर रिव्यू करती रही है। पिछली बार 2014 में काडर रिव्यू हुआ था। अब एक बार फिर से काडर रिव्यू की कार्यवाही शुरू करते हुए प्रदेश सरकार से जुलाई के अंतिम सप्ताह तक प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है। शासन के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में काडर की मौजूदा संख्या की 5 प्रतिशत तक वृद्धि अनुमन्य है। इसके लिए औचित्य सहित प्रस्ताव देना होता है।

5 प्रतिशत से अधिक पद वृद्धि के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री के स्तर से अनुमोदन लेने की व्यवस्था है। इससे संबंधित विशेष कार्यात्मक औचित्य भी बताना होगा। शासन स्तर पर कई पद कार्य की आवश्यकता के साथ सृजित किए जाते रहे हैं। तमाम केंद्रीय योजनाओं व नए विषयों पर फोकस किए जाने से भी काम बढ़ा है। मुख्यमंत्री तक समय-समय पर अफसरों की कमी की बात करते रहे हैं। ऐसे में पद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक मुकुल सिंघल ने विभागों को खास तौर से निर्देश दिए हैं कि वे प्रस्ताव प्रोन्नति को ध्यान में रखकर न बनाएं बल्कि पिछले काडर रिव्यू के बाद योजनाओं, विभागों व जिलों के सृजन व आवश्यकता के पूर्ण औचित्य के साथ तैयार कर उपलब्ध कराएं।

काडर रिव्यू पर विभागों के पुनर्गठन का भी पड़ सकता है असर

बताते चलें, शासन स्तर पर नीति आयोग के निर्देश पर विभागों के पुनर्गठन की कार्यवाही चल रही है। इससे जुड़े प्रस्ताव को अगले सप्ताह तक अंतिम रूप देने की योजना है। काडर रिव्यू में विभागों के पुनर्गठन का असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रस्तावित व्यवस्था में कई विभागों समाप्त कर दूसरे विभागों में विलय तक का प्रस्ताव है। इसके अलावा शासन स्तर पर अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के लिए आयुक्त के कई पद बढ़ाने के भी प्रस्ताव हैं।
 
प्रस्ताव बनाते समय इन बातों का रखना होगा ध्यान
  • काडर वृद्धि का प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए प्रपत्र पर पूरे विवरण के साथ तैयार करें। काडर गैप की स्थिति अलग से तैयार कर भेजी जाए।
  • वर्तमान में कार्य की आवश्यकता के लिहाज से कई नि:संवर्गीय व प्रतिनियुक्ति के पद सृजित हैं। ऐसे पदों की यदि भविष्य में लगातार आवश्यकता है तो स्पष्ट औचित्य के साथ उसे संवर्गीय पद में बदलकर प्रस्ताव दिया जाए।
  • ऐसे पद जो पूर्व में काडर में सृजित हैं लेकिन उनकी वर्तमान में आवश्यकता नहीं है, ऐसे पदों को काडर से हटाने के संबंध में प्रस्ताव दिया जाए।
  • जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार कर विभाग में संगठनात्मक बदलाव की जरूरत होगी। आवश्यकता होने पर इस दृष्टि से विचार कर प्रस्ताव दिया जाए।
  • इसी तरह राजस्व विभाग, आवास व शहरी नियोजन विभाग तथा नगर विकास विभाग आदि में भी नवीन आवश्यकताओं के मद्देनजर पद सृजित हैं। इनमें से काडर के लिए चिह्नित पद व प्रतिनियुक्ति से भरे जाने वाले पदों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
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पिछली बार 29 पद बढ़े थे

2014 में काडर रिव्यू किए जाने पर आईएएस संवर्ग में 29 पद बढ़े थे। 31 दिसंबर 2014 की अधिसूचना के अनुसार यूपी काडर के लिए 621 पद स्वीकृत हुए थे। इनमें 433 पद सीधी भर्ती के लिए व 188 पद पदोन्नति के लिए दिए गए। इससे पहले यूपी काडर में आईएएस के पदों की संख्या 592 थी। 
 
पद बढ़े तो पीसीएस अफसरों को जल्दी आईएएस बनने का मिलेगा मौका 
प्रस्तावित काडर पुनर्गठन से यदि केंद्र पद बढ़ाने की मंजूरी देता है तो इसका फायदा पीसीएस अधिकारी भी पाएंगे। आईएएस संवर्ग में एक तिहाई पद पीसीएस से आईएएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए तय हैं। वर्तमान में 188 पद पीसीएस अफसरों की पदोन्नति के लिए सुरक्षित हैं। जितने पद बढ़ेंगे, उसका एक तिहाई पद पीसीएस संवर्ग को मिल सकेगा।
 
आईएएस व पीसीएस के पदों पर नए सिरे से विचार संभव
काडर पुनर्गठन में आईएएस अधिकारियों के लिए निर्धारित पदों पर नए सिरे से विचार की संभावना है। प्रदेश में नगर आयुक्त व विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष के पद पीसीएस अफसरों के लिए आवंटित हैं। आईएएस एसोसिएशन लंबे समय से इन पदों की मांग करती रही है। शासन स्तर से इनमें तमाम पदों पर आईएएस अफसरों की तैनाती की जाती रही है। पीसीएस एसोसिएशन इन पदों पर आईएएस की तैनाती का विरोध करती रही है। ऐसे में इस पर भी नजरें रहेंगी कि सरकार नगर आयुक्त व विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष का पद प्रस्ताव में शामिल करती है या नहीं। 
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