मुख्य सचिव राजीव कुमार की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हुई। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के 64 अधिकारियों की पदोन्नति पर विचार हुआ। इनमें प्रमुख सचिव स्तर के 7 अधिकारियों को अपर मुख्य सचिव, सचिव स्तर के तीन अधिकारियों को प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति की संस्तुति की गई है।
इसके अलावा विशेष सचिव से सचिव स्तरीय पदों व जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड से सलेक्शन ग्रेड में भी पदोन्नति की संस्तुति की गई। कुछ अधिकारियों की एंट्री पूरी न होने की वजह से उनकी पदोन्नति स्थगित कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक पदोन्नति समिति ने 1986 बैच के आईएएस अधिकारियों को प्रमुख सचिव स्तर से मुख्य सचिव वेतनमान और अपर मुख्य सचिव पदनाम पर पदोन्नति की संस्तुति की है। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के चेयरमैन एवं सीईओ आलोक टंडन, प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक सिन्हा, प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर संयुक्त सचिव के रूप में कार्यरत बलविंदर सिंह भुल्लर, प्रमुख सचिव होमगार्ड कुमार कमलेश, उप चुनाव आयुक्त केंद्रीय निर्वाचन आयोग उमेश सिन्हा व केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव प्रभात कुमार सारंगी अपर मुख्य सचिव पद पर पदोन्नत होंगे।
1993 बैच के सचिव स्तर के अधिकारियों राजीव अग्रवाल, आलोक कुमार-द्वितीय व वीना कुमारी मीना को प्रमुख सचिव स्तर में पदोन्नति की संस्तुति की गई है। ये सभी अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।
इनकी पदोन्नति स्थगित करने का बना विचार
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2002 बैच के आईएएस अधिकारियों को सचिव वेतनमान और 2005 बैच को जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड से सेलेक्शन ग्रेड में पदोन्नति की संस्तुति की गई है। इन दोनों बैच में कई अधिकारी ऐसे हैं जिनकी पिछले 10 साल में चार या इससे अधिक वर्ष की एंट्री उपलब्ध नहीं है। समिति ने इनकी पदोन्नति स्थगित करने का फैसला किया है। एंट्री पूरी होने के बाद इनकी पदोन्नति पर विचार होगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि कुल कितने अधिकारियों की पदोन्नति रुकी है।
पदोन्नति के बाद तबादले भी तय
सूत्रों ने बताया कि विभागीय पदोन्नति समिति ने जिन पदोन्नतियों की संस्तुति की है, उनके आदेश नए साल केपहले दिन जारी हो सकते हैं। इनमें 2002 बैच के अधिकारियों में कई अधिकारी जिलों में डीएम की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे अधिकारी पदोन्नति के बाद डीएम से कमिश्नर (सचिव) स्तर पर आ जाएंगे। ऐसे जिलों में फेरबदल भी करना होगा। इसी तरह पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद शासन स्तर पर भी कई अधिकारियों को इधर से उधर किए जाने की संभावना है।
इन्हें विशेष सचिव से सचिव स्तर पर पदोन्नति देने पर विचार
2002 बैच : पंकज कुमार, समीर वर्मा, गौरी शंकर प्रियदर्शी, डॉ. सेंथिल पांडियन सी., संजय कुमार, मनीषा त्रिघाटिया, नरेंद्र कुमार सिंह, चंद्रपाल सिंह, राजीव रौतेला, अजय दीप सिंह, राम विशाल मिश्र, डॉ. अलका टंडन भटनागर, सुधेश कुमार ओझा, चंद्रप्रकाश त्रिपाठी, हरेंद्र वीर सिंह, रमेश मिश्रा, शारदा सिंह, गया प्रसाद, जय प्रकाश सगर, कर्ण सिंह चौहान, कुमुदलता श्रीवास्तव, संध्या तिवारी, ओम प्रकाश वर्मा, हृदय शंकर तिवारी, शरद कुमार सिंह, सीताराम यादव, आनंद कुमार सिंह-प्रथम, जगत राज, सत्येंद्र सिंह, राजमणि यादव।
सेलेक्शन ग्रेड में इनकी पदोन्नति पर हुआ विचार
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2005 बैच : सुरेंद्र सिंह, कंचन वर्मा, डॉ. लोकेश एम., गोविंद राजू एनएस., गुर्राला श्रीनिवासुलु, जितेंद्र बहादुर सिंह, नरेंद्र सिंह पटेल, राकेश कुमार सिंह-प्रथम, दिनेश कुमार सिंह-द्वितीय, डॉ. सुरेंद्र कुमार, अनिता श्रीवास्तव, सुरेश कुमार, विमल कुमार शर्मा, संतोष कुमार राय, सुरेश कुमार सिंह, शमीम अहमद खान, नरेंद्र शंकर पांडेय, नागेंद्र प्रसाद सिंह, दिग्विजय सिंह, डॉ. अजय शंकर पांडेय, सुरेंद्र विक्रम, राघवेंद्र विक्रम सिंह, विद्या सागर प्रसाद व योगेश्वर राम मिश्र।
1987 बैच के अफसरों की पदोन्नति अटकी
यूपी आईएएस एसोसिएशन ने पिछले दिनों आईएएस वीक के दौरान अपनी आमसभा में सरकार से 1987 बैच के आईएएस अधिकारियों को भी प्रमुख सचिव से अपर मुख्य सचिव पद पर पदोन्नति का आग्रह किया था। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने इस संबंध में कार्यवाही भी शुरू की। परामर्शी विभागों की सहमति भी मिल गई।
सूत्रों ने बताया कि उच्च स्तर से सहमति न मिल पाने की वजह से इस बैच के अधिकारियों की पदोन्नति का मामला विचार के लिए नहीं रखा जा सका। इन अधिकारियों को पदोन्नति के लिए अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा। 1987 बैच में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अरुण सिंघल, अवनीश कुमार अवस्थी, महेश कुमार गुप्ता, लीला नंदन, रेणुका कुमार, देबाशीष पंडा, संजीव कुमार मित्तल, रमा रमण, हेमंत राव, पीवी जगनमोहन, सुनील कुमार, जीवेश नंदन शामिल हैं।
अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक दीपक त्रिवेदी का कहना है कि विभागीय पदोन्नति समिति की संस्तुतियां मुख्यमंत्री को भेजी जाएंगी। मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद ही पता चलेगा कि अंतिम तौर पर कितने अफसरों की पदोन्नति होगी।