प्रमुख सचिव होमगार्ड्स संजीव दुबे ने बृहस्पतिवार को गौतमपल्ली स्थित आवास पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वे करीब दस साल से ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों में दर्द) की बीमारी से पीड़ित होने के साथ ही डिप्रेशन के शिकार भी थे। पुलिस को प्रमुख सचिव के हाथों लिखा सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने बीमारी से परेशान होकर खुदकुशी करने की बात कही है। उनकी मौत की खबर मिलते ही होमगार्ड विभाग के मंत्री दुर्गा प्रसाद, मुख्यमंत्री के सलाहकार आलोक रंजन, डीजीपी जावीद अहमद, प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा समेत शासन के कई अधिकारी मौके पर पहुंचे।
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संजीव दुबे 1987 बैच के आईएएस अधिकारी थे। पुलिस ने बताया कि प्रमुख सचिव की पत्नी और बच्चे बुधवार को गुड़गांव गए थे। संजीव दुबे दिन में कहीं बाहर गए और रात करीब साढ़े दस बजे घर लौटे। इसके बाद सभी नौकरों को छुट्टी दे दी। सिर्फ एक नौकर को छोटे-मोटे काम के लिए रोक लिया था। बाद में उन्होंने नौकर से सुबह जगाने के लिए मना करते हुए उसे भी घर भेज दिया था। संजीव की मौत की सूचना मिलने पर डीआईजी रेंज प्रवीण कुमार, डीएम सत्येंद्र कुमार सिंह, एसएसपी मंजिल सैनी ने मौके पर पहुंचकर कमरे का निरीक्षण किया। फोरेंसिक टीम ने कमरे से साक्ष्य एकत्र किए हैं। उनके परिवारीजन गुड़गांव से लखनऊ के लिए रवाना हो चुके हैं।
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घर लौटा नौकर तो बंद मिला दरवाजा
संजीव का नौकर बृहस्पतिवार शाम करीब चार बजे घर आया तो दरवाजा बंद मिला। उसने कई बार प्रमुख सचिव का फोन मिलाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तब नौकर ने प्रमुख सचिव के पीए से संपर्क किया। शाम करीब सात बजे गौतमपल्ली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो प्रमुख सचिव का शव लटका मिला। कमरे से मिले सुसाइड नोट में प्रमुख सचिव ने बीमारी के चलते जान देने की बात लिखी है। (संजीव के सरकारी आवास पर पहुंचे डीजीपी जावीद अहमद।)
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5 दिन से कर रहे थे सुसाइड की तैयारी
पुलिस ने नौकरों से पूछताछ की तो चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं। पता चला कि संजीव 5 दिन से सुसाइड की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने झूला डालने का बहाना कर दो कमरों के बीच लोहे की रॉड लगवाई थी। इसमें रस्सी बांधकर कई बार देखा भी कि झूले की वजह से रॉड टूट तो नहीं जाएगी। परिवारीजन और नौकर भी पहले यही समझते रहे कि संजीव झूला लगवाना चाहते हैं लेकिन बृहस्पतिवार को शव उसी लोहे की रॉड और रस्सी से लटका देखकर सबको उनकी मनोदशा का पता चला। (उनके घर पहुंचे अधिकारी।)
डायवर्ट कर दी थीं मोबाइल फोन की कॉल
रात को सोने से पहले प्रमुख सचिव ने अपने मोबाइल फोन की कॉल डायवर्ट कर दी थीं। दो बार घंटी बजने के बाद फोन नॉट रीचेबल बताने लगता था। नौकर ने जब प्रमुख सचिव को जगाने के लिए फोन किया तो उसकी कॉल नहीं लगी। इसके बाद उसने संजीव के पीए से संपर्क किया। पीए ने भी कई बार नंबर मिलाया। काफी देर फोन शुरू होने का इंतजार किया। कोई जानकारी न मिलने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। (उनके घर पहुंचे आईपीएस अमिताभ ठाकुर व उनकी पत्नी नूतन ठाकुर।)