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'अपने' ही लुटिया डुबो रहे IAS कैडर की

Tue, 18 Feb 2014 03:53 PM IST
महे्द्र तिवारी/अमर उजाला, लख्ानऊ
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बानगी एक- मुख्यमंत्री ने पिछले साल एक कार्यक्रम में खुलासा किया था कि एक अफसर से उन्होंने किसी काम के लिए कहा।
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पहले उसने महीनों तक लटकाया। बाद में जब उससे पूछताछ की गई तो उसने दो पेज की आपत्ति लगाकर फाइल भेज दी। दूसरे अफसर से कहा, उसने दो लाइन में ही रास्ता निकाल दिया।

बानगी दो- मुख्यमंत्री ने आईएएस वीक में खुलासा किया कि एक अफसर ने काम के लिए एक व्यक्ति से पैसे लिए। काम भी नहीं कराया। जब उनके फोन पर यह शिकायत आई तो इसकी तस्दीक कराई गई।
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बात सही निकली और अफसर से रकम वापस दिलाई गई। हालांकि कोई बड़ी कार्रवाई न करते हुए उसे बख्श दिया गया।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके यहां ट्रांसफार पोस्टिंग में कभी पैसा नहीं लिया गया लेकिन सिफारिश कभी-कभी माननी ही पड़ती है।

ये मामले तो आईएएस कैडर के कामकाज की बानगी भर हैं। कैडर के भीतर तात्कालिक लाभ के लिए अपने ही साथियों की राह में कांटे बोने वाले तो पहुंच ही गए हैं।

बल्कि भ्रष्ट आचरण और राजनीतिक आकाओं की जी-हुजूरी कर कैडर की गरिमा गिराने वालों का वर्ग भी तेजी से पनपा है। आईएएस एसोसिएशन ने बड़ी साफगोई से ब्यूरोक्रेट्स की ‘बाबू’ वाली छवि को स्वीकार किया है।

मगर इस छवि से पीछा छुड़ाने के लिए जो तात्कालिक कदम उठाने की बात कही गई है, वह बहुत उम्मीद नहीं बंधाती।

अवकाश प्राप्त प्रशासनिक अधिकारियों से बात कर इस प्रतिष्ठित कैडर की गिरती छवि के कारण और उसके निवारण के तरीके पूछे ताकि एसोसिएशन इससे भी कुछ राह निकाल सके। 

‘न’ कहने का हिम्मत जुटाएं
जी. पटनायक (अवकाश प्राप्त आईएएस अफसर)
आईएएस कैडर की आज भी अपनी प्रतिष्ठा है। ज्यादातर लोग अच्छे हैं। मगर कुछ ऐसे अफसर जरूर आए हैं जो तात्कालिक लाभ के लिए अपने लंबे कॅरिअर से समझौता करने लगे हैं।

संवर्ग में आने वाले हर अफसर को यह सोचना होगा कि सिस्टम में हर पद पर कोई न कोई अपना ही रहेगा। लंबे सर्विस कॅरिअर में बहुत सारे पदों पर काम करने का अवसर आता है।

जो लोग तात्कालिक लाभ के लिए ऐसा करते हैं, उन्हें कभी न कभी इसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है। नए लोगों को इससे सबक लेना चाहिए।

दूसरा, आज के दौर में अफसरों से सत्ताधारी राजनीतिक दलों की अपेक्षाएं कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं। वे चाहते हैं कि अफसर दलगत रूप से काम करें। यह अफसरों के लिए बड़ी चुनौती है।

अधिकारियों को यहीं अपनी पहचान दिखानी होगी। यह अच्छी बात है कि एसोसिएशन ने अपनी छवि को लेकर चर्चा की।

पुराना गौरव पाने के लिए गलत को ‘न’ कहने का साहस दिखाना होगा। वजह, किसी दबाव में गलत को हां करके आईएएस अफसर यह कहकर नहीं बच सकता कि उसने फलां के कहने से यह फैसला लिया था।
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तमाम मामलों में यह बात सामने आ चुकी है। इसके अलावा संवर्ग में जो लोग गलत आचरण व व्यवहार कर रहे हैं, उनके बारे में सबको पता होता है।

ऐसे लोगों को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे नए व युवा अफसरों को बड़ी ताकत मिलेगी और वे ईमानदारी पूर्वक काम कर सकेंगे। इसके अलावा एसोसिएशन में समय-समय पर तात्कालिक मुद्दों पर बात होती रहनी चाहिए।
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