सेना में रैंक को लेकर भले ही कोई भेदभाव न रहा हो लेकिन पेंशन में समानता को लेकर उन्हें एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।
‘एक रैंक, एक पेंशन’ योजना को कभी भाजपा ने अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया तो कभी कांग्रेस की ओर से आश्वासन भी मिले।
दो दिन पहले जब हजारों पूर्व सैनिकों ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अपना दुखड़ा सुनाया तो आखिरकार उन्हें इसकी सुध आई।
ठीक चुनाव से पहले इस ऐतिहासिक कदम से उन पूर्व सैनिकों की माली हालत सुधरेगी जिन्हें अपने परिवार का पेट पालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
‘एक रैंक, एक पेंशन’ की मांग पूरी होने पर पूर्व सैनिकों ने अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि देर से ही सही, आखिर हक तो मिला।
हालांकि उन्हें इस बात का मलाल भी है कि जो पूर्व सैनिक इस मुहिम के दौरान दिवंगत हो गए, उनको इसका लाभ नहीं मिल सका।