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योगी राज में बढ़ा आईएएस काडर का रुतबा, विकास प्राधिकरण में 15 में से 14 में अफसर उपाध्यक्ष

Tue, 25 Aug 2020 10:43 AM IST
शाहरुख खान महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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प्रदेश के आईएएस अधिकारी सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ क्रिकेट मैच खेलकर जो उपलब्धि नहीं पा सके, योगी आदित्यनाथ सरकार में वह सब हासिल करने में सफ ल रहे हैं।
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काडर के अफ सरों की परंपरा से हटकर समय से पहले वरिष्ठतम पदों पर पदोन्नति हो या दूसरे संवर्गों के लिए चिह्नित पदों पर आईएएस अफ सरों की तैनाती का मामला, इसे साफ.-साफ  देखा जा सकता है। आईएएस अफसरों का प्रभुत्व मातहत संवर्गों के प्रशासनिक पदों की खींचतान तक सीमित नहीं है। 

भर्ती व चयन आयोगों में भी डायरेक्ट अफसरों का दबदबा देखा जा सकता है। शासन स्तर पर सभी विभागों का मुखिया होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण विभागों के विभागाध्यक्ष पदों को भी विभागीय अधिकारियों से लेकर आईएएस अफसरों के लिए सुरक्षित कर दिया गया है। 
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काडर पुनर्गठन के बाद विभागाध्यक्ष के कई और प्रमुख पद भी आईएएस काडर के पास आने वाले हैं। प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है।

एसीएस पद पर परंपरा तोड़कर प्रमोशनः सपा शासनकाल में आईएएस संवर्ग के अन्य पदों की तरह प्रमुख सचिव से अपर मुख्य सचिव (एसीएस) पद पर भी एक बैच को हर वर्ष एक जनवरी को पदोन्नति देने की परंपरा थी। मौजूदा सरकार आने के बाद 2018 में यह परंपरा तोड़कर वर्ष के बीच में 1987 बैच को पदोन्नति दी गई। 

इसके बाद 2020 में एक ही दिन 1988 और 1989 बैच को पदोन्नति दी गई। इन पदों पर तैनाती अतिरिक्त पद सृजित कर की गई। इसके उलट ऐसे संवर्गों की भरमार है जिनके कर्मी समय बीतने के बावजूद वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।  

विकास प्राधिकरण: 15 में से 14 में आईएएस अफसर उपाध्यक्ष
प्रदेश के 16 विकास प्राधिकरणों में उपाध्यक्ष के पद विभिन्न वेतनमानों में पीसीएस अफसरों के लिए चिह्नित हैं। इनमें 15 प्राधिकरणों में नियमित उपाध्यक्षों की तैनाती है। आईएएस की तैनाती वाले प्राधिकरणों में गाजियाबाद, कानपुर नगर, बुलंदशहर, शुक्लागंज-उन्नाव, अलीगढ़, लखनऊ, मुरादाबाद, प्रयागराज, आगरा, मेरठ, बरेली, गोरखपुर, वाराणसी, हापुड़-पिलखुआ शामिल हैं। सहारनपुर में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी के पास प्रभार है।

सीडीओ : पद पीसीएस-पीडीएस के, पर 49 जिलों की कमान आईएएस को 
75 जिलों में से 73 में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के पद अलग-अलग संवर्गों के लिए चिह्नित हैं। 45 जिलों में सीडीओ का पद विभिन्न वेतनमानों में पीसीएस के लिए व 28 पद ग्राम विकास विभाग के पीडीएस संवर्ग के लिए है। इन 73 में से आठ महत्वाकांक्षी जिलों में युवा आईएएस की तैनाती की व्यवस्था बना दी गई। मगर, अभी 49 जिलों में आईएएस संवर्ग के सीडीओ तैनात हैं। बाकी 26 जिलों में से पांच में पीसीएस और अन्य में पीडीएस के अधिकारी हैं

अखिलेश के साथ क्रिकेट खेलकर जो न मिला, योगी राज में पाने में सफल रहे आईएएस, प्रमुख पदों पर सेवानिवृत्त आईएएस अफसरों की तैनाती 

17 नगर निगमों में से 12 की कमान आईएएस अफसरों को  
प्रदेश में नगर निगमों के नगर आयुक्त का पद पीसीएस संवर्ग के अधिकारियों के लिए सुरक्षित है। लेकिन, 17 में से 12 नगर निगमों-अयोध्या, मेरठ, वृंदावन-मथुरा, अलीगढ़, झांसी, कानपुर नगर, प्रयागराज, बरेली, वाराणसी, आगरा, लखनऊ और गाजियाबाद की कमान आईएएस अफसरों के हवाले है। सहारनपुर, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, शाहजहांपुर व गोरखपुर में ही वरिष्ठ पीसीएस अफसर नगर आयुक्त हैं।

चार में से तीन चयन आयोगों के चेयरमैन रिटायर्ड डायरेक्ट आईएएस
प्रदेश में चार चयन-भर्ती आयोग हैं। सपा शासनकाल में एक भी आयोग की कमान रिटायर्ड डायरेक्ट आईएएस अफसरों को नहीं मिली थी। अभी यूपीपीएससी में प्रभात कुमार, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में वीरेश कुमार, यूपीएसएसएससी में प्रवीर कुमार चेयरमैन हैं। ये तीनों ही अवकाश प्राप्त डायरेक्ट आईएएस अधिकारी हैं। उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की कमान प्रोफेसर ईश्वर शरण विश्वकर्मा के हवाले है।

बेहतर करने के प्रयोग में नए पद भी मिले
सरकार ने शिक्षा, जल निगम व उद्योग बंधु जैसी संस्थाओं के प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से डिजाइन किया है। आईएएस के लिए बेसिक शिक्षा महानिदेशक का नया पद सृजित किया गया। इससे कई विभागीय निदेशक महानिदेशक के अधीन हो गए। इस प्रयोग का फील्ड में बेहतर असर बताया जा रहा है। इसी तरह जल निगम में एमडी व जॉइंट एमडी के पद इंजीनियरों के होते थे। सरकार ने एमडी के साथ जॉइंट एमडी के कई पद सृजित कर दिए। इससे जल निगम की कमान सीधे आईएएस अफसरों के हाथ में आ गई। उद्योग बंधु को खत्म कर इन्वेस्ट यूपी नाम की नई संस्था गठित की गई है। इसके  सीईओ का पद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के लिए तय है।
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...लेकिन राज्य नीति आयोग का गठन खटाई में

मोदी सरकार के हर कदम का अनुसरण करने में सबसे आगे रहने वाली प्रदेश सरकार नीति आयोग के गठन के अनुसरण में चूक गई। चर्चा है कि एक रिटायर्ड मुख्य सचिव को इस कुर्सी पर न आने देने के लिए ब्यूरोक्रेसी के ही एक वर्ग ने इसके गठन को लटकाया। आयोग के अस्तित्व में आने पर आईएएस अफसरों का ही दबदबा रहना है।
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