लखनऊ। एक ओर हास्यकवि सुरेंद्र शर्मा की हंसोड़ रचनाएं। दूसरी ओर देश के जाने माने शायर प्रो. वसीम बरेलवी की जीवन दर्शन से जुड़ी पंक्तियां। काव्य कुंभ में रचनाकारों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखने का काम किया। उन्हें मंत्रमुग्ध कर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
मौका था जश्न ए अदब साहित्योत्सव संस्था की ओर से शुक्रवार से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो हॉल में शुरू हुए दो दिवसीय कल्चरण कारवां कार्यक्रम का। पहले दिन कोर्ट मार्शल नाटक में कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं मंच पर पद्मश्री रंजना गौहर के ओडिशी नृत्य ने दर्शकों की तालियां हासिल कीं। देर शाम कवि सम्मेलन काव्यकुंभ शुरू हुआ। हास्कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा ने कोई फर्क नहीं पड़ता इस देश में राजा रावण हो या राम... सुनाया, जिस पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद शारिक कैफी ने बिन कहे आउंगा जब भी आउंगा, मुंतजिर आंखों से घबराता हूं मैं...सुनाया।
अरशद नदीम ने यार मेरा बहुत हसीं भी नहीं, उसके जैसा मगर कहीं भी नहीं...सुनाया। डार्क हॉर्स के रचयिता नीलोत्पल मृणाल ने उस दौर का जादू क्या जानें, ये रील बनाने वाले लड़के...सुनाया। वहीं अज्म शाकिरी ने मैं सच की रौशनी बिखेरने में ही लगा रहा, तमाम लोग बन गए महान झूठ बोल कर..., रामायण धर द्विवेदी ने किस तरह पेड़ फूलें फलें, जब जड़ें डालियों से जलें..., रंजन निगम ने सवाल चेहरा, जवाब आंखें , मैं पढ़ रहा हूं किताब आंखें... तथा डॉ. भावना श्रीवास्तव ने और तो कुछ नहीं होता तेरे मिलने से मगर, जिंदगी काबिल ए बर्दाश्त बनी रहती है...सुनाया। दर्शकों का जोश उस वक्त दोगुना हो गया, जब मंच पर प्रो. वसीम बरेलवी पहुंचे। उन्होंने सुनाया- सांस रुकते ही तुझे मौत कहा जाएगा, जिंदगी तुझको तेरा नाम दिया है मैने... सुनाया तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
अगले सत्र में दास्तांगोई का आयोजन हुआ जिसमें दानिश इक़बाल द्वारा निर्देशित ''दास्तां - ए - राम'' की प्रस्तुति फौजिया और रितेश यादव द्वारा दी गई। इस खास प्रस्तुति में दोनों ने प्रभु राम के जीवनवृत्त और उनकी प्रभुताई का परिचय अनोखे अंदाज में कराया। थियेटर,सिनेमा और संगीत पर चर्चा के लिए आए मेहमानों ने बहुत सार्थक संवाद स्थापित किया जिसमें राज कपूर और मोहम्मद रफी के जन्म- शताब्दी वर्ष पर उन्हें भावांजलि दी गई।
कोर्ट मार्शल में दिखा समाज का सच
कार्यक्रम में अस्मिता थिएटर की ओर से स्वदेश दीपक के चर्चित नाटक कोर्ट मार्शल का मंचन किया गया। निर्देशक अरविंद गौड़ के इस नाटक में समाज का सच दिखा। सुशान बरार, बजरंज बली सिंह, प्रभाकर पांडे, मनु ऋषि चड़ढा ने नाटक में शानदार अभिनय किया।