लखनऊ। रेलवे डीजल इंजनों के बजाय इलेक्ट्रिक इंजनों का इस्तेमाल कर रही है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ राजस्व की बचत भी हो रही है। वहीं, अब हाइड्रोजन से ट्रेनें चलाने पर काम हो रहा है। यह रेलवे की तस्वीर बदल देंगी।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) एवं अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के सहयोग से आरडीएसओ स्टेडियम में चल रही इनो रेल प्रदर्शनी के दूसरे दिन शुक्रवार को विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। दुनियाभर से आए रेलवे विशेषज्ञों ने सेमिनार में बात रखी। प्रदर्शनी में रूस, ऑस्ट्रिया, जर्मनी समेत 175 देशों की कंपनियां आईं।
आरडीएसओ में हाइड्रोजन ट्रेन पर अनुसंधान चल रहा है। टीयूवी एसयूडी साउथ एशिया के बिजनेस यूनिट मैनेजर रेने बम्बोर ने इन ट्रेनों में सुरक्षा का मुद्दा उठाया। रेल कोच फैक्टरी कपूरथला के महाप्रबंधक एसके सूरी ने वंदे भारत ट्रेनों पर व्याख्यान दिया। बताया कि जल्द ही वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को लॉन्च किया जाएगा।
एलओबी वाहन ग्लोबल रोलिंग स्टॉक प्लेटफॉर्म हिताची रेल के प्रबंधन प्रमुख एलेसेंड्रो वानुची ने ट्रेनों की बॉडी डिजाइन, हादसों से बचाने के तरीकों, इंटीरियर डिजाइन और ऊर्जा बचाने को लेकर बात रखी। रोलिंग स्टॉक को अत्याधुनिक बनाने की जरूरत पर भी बल दिया।
लॉरिट्ज नुडसन इलेक्ट्रिकल एंड ऑटोमेशन के रिसर्च विंग के उपाध्यक्ष संदीप खराटे ने ट्रेनों में ब्रेकडाउन और यात्री सुविधाओं के रखरखाव पर ध्यान बढ़ाया।
मोबिलिटी सीमेंस लिमिटेड के सुब्बाराव चिट्टिला ने सीमेंस के नौ हजार अश्वशक्ति के इंजन के बारे में बताया। लोकोमोटिव तकनीकी के उन्नत होने की जरूरत पर बल दिया। ईपीएलएएन सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के अकाउंट सेल्स मैनेजर मोहित कौल ने रेलवे के स्वदेशीकरण पर बात रखी।