बीते दिनों हुए जूनियर शिक्षकों के प्रमोशन को चुनौती देने वाली एक याचिका पर कोर्ट के रुख के बाद प्राथमिक शिक्षकों के प्रोन्नति पर ग्रहण लग गया। कोर्ट के इस रुख पर तस्वीर भले ही पूरी तरह 21 सितंबर को साफ हो लेकिन प्राथमिक शिक्षकों के चेहरे की चमक फीकी पड़ गई है।
बीते 16 जुलाई को जनपद के विभिन्न उच्च प्राथमिक विद्यालय में बतौर सहायक अध्यापक व प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक पद पर तैनात 175 शिक्षकों को जूनियर हाईस्कूल का प्रधानाध्यापक बनाया गया था।
इसके लिए काउंसलिंग में निशक्त, महिला व पिछड़े विकाखंड में पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों से विकल्प भी लिए गए थे। विकल्प लेने के बाद सभी 175 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी कर पदास्थापित किया गया था। बाद में इसी मामले को लेकर कुछ शिक्षकों ने उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में एक वाद दायर कर दिया था।