गौतमपल्ली थाने में यूं टिन शेड में लटके मिले थे विसरा।
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कहीं पुलिस की लापरवाही तो कहीं फोरेंसिक लैब के जिम्मेदारों की मनमानी के चलते नमूनों की समयबद्ध जांच नहीं हो पा रही। विसरा के खराब नमूनों को नष्ट करने के लिए भी पुलिसकर्मी प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेज रहे हैं, लेकिन इसकी भी अनुमति नहीं मिल रही।
शहरी और ग्रामीण के 43 थानों में 650 से अधिक विसरा के नमूने रखे हुए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सबसे ज्यादा विसरा गोमतीनगर, चौक, वजीरगंज, हजरतगंज, विभूतिखंड और आशियाना थानों में रखे हैं। गोमतीनगर में इस वर्ष के ही 20 विसरा के नमूने फोरेंसिक लैब भेजे जाने का इंतजार कर रहे हैं।
पिछले साल के भी इतने ही नमूने रखे हुए हैं। चौक, वजीरगंज, विभूतिखंड में 10 से 15 नमूने हैं जबकि हजरतगंज में इस साल के छह मामले लंबित हैं। सरोजनीनगर में 28, गुडंबा में छह, गौतमपल्ली में पांच, पारा में आठ, हसनगंज में 12 नमूने रखे-रखे खराब हो रहे हैं।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि कई नमूने खराब हो चुके हैं तो कई केस अदालत से छूट चुके हैं। ऐसे में मालखाना में रखे नमूनों को नष्ट करना होता है, लेकिन पुलिस को इसकी अनुमति नहीं है।
गोमतीनगर थाना में 60 नमूने निस्तारित करने के लिए वर्ष 2017 में डीएम को पत्र लिखा गया था, जिसका जवाब अब तक नहीं आया है। मालखाना में रखे विसरा के नमूने पुलिस के लिए किसी सिरदर्द से कम नही हैं।
फोरेंसिक लैब से बहाने बनाकर टरका देते हैं जिम्मेदार
पुलिस सूत्र बताते हैं कि विसरा के नमूनों को फोरेंसिक लैब पहुंचाना किसी मुसीबत से कम नहीं है। कई चक्कर लगाने के बाद भी लैब के जिम्मेदार नमूने लेने को तैयार नहीं होते। कागजातों में कमी या कोई न कोई बहाना बनाकर नमूने लौटा दिए जाते हैं या बार-बार टरका दिया जाता है।
ऐसी दशा में पुलिसकर्मी भी कोर्ट के आदेश के इंतजार में बैठ जाते हैं। गौतमपल्ली थाना में लामार्ट छात्र राहुल श्रीधर की तरह कई ऐसे प्रकरण हैं जिनमें कोर्ट ने हस्तक्षेप किया, तब फोरेंसिक लैब के अधिकारियों ने विसरा के नमूनों की जांच की।