डॉ बीरबल साहनी और डॉ रितु करिथल
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वर्ष 1985 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 72वें संस्करण के दौरान यह नक्षत्रशात्रा चालू हालत में थी। लविवि को बांटनी की एक नई विधा पेलियोबॉटनी का अविष्कार करने का श्रेय भी जाता है। विवि के बॉटनी विभाग के पहले विभागाध्यक्ष प्रो. बीरबल साहनी ने इसकी शुरुआत की। इस विधा में जीवाश्म पौधों का अध्ययन किया जाता है।
प्रो. बीरबल साहनी ने सितंबर 1939 में पेलियोबॉटनी समिति का गठन किया। इस समिति के माध्यम से इस क्षेत्र में किये जाने वाले कामों पर शोधपत्रों का प्रकाशन किया गया। इसके बाद सदस्यों ने मिलकर वर्ष 1946 में पेलियोबॉटनी संस्थान की नींव रखी। प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तीन अप्रैल 1949 को इसके भवन निर्माण की नींव रखी।
लविवि के मैदान ने हॉकी में केडी सिंह बाबू और सुजीत कुमार समेत आधा दर्जन से ज्यादा ओलंपियन दिए हैं। इसके साथ ही क्रिकेट में सुरेश रैना से लेकर आरपी सिंह और अशोक बाम्बी जैसे खिलाड़ी भी रहे हैं। लविवि एथलेटिक्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन ने बताया कि लविवि में रोइंग के साथ ही टेनिस भी काफी उन्नत अवस्था में था।
हॉकी, क्रिकेट और फुटबाल के साथ ही यहां पर टेनिस काफी लोकप्रिय था। एक समय यहां पर 18 टेनिस ग्राउंड हुआ करते थे। लविवि के ही पूर्व छात्र गौस मोहम्मद खान वर्ष 1939 में विम्बलडन में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे थे। उन्हें वर्ष 1971 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
हॉकी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कुंवर दिग्विजय सिंह, मो. शाहिद, सैयद अली और सुजीत कुमार एथलेटिक्स एसोसिएशन से जुड़े रहे। लविवि ग्राउंड पर भारत पाकिस्तान के बीच एक क्रिकेट मैच भी हो चुका है। लविवि से इसके साथ ही कुश्ती और ताइक्वांडो के भी कई बड़े खिलाड़ी हो चुके हैं।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष समेत प्रशासनिक अधिकारियों की नर्सरी भी रहा विवि
लविवि ने देश को शानदार आईएएस अधिकारी दिए हैं। इन अधिकारियों ने अपनी प्रशासनिक क्षमता से देश के शीर्ष पदों पर स्थान बनाया है। इन अधिकारियों में आज की तारीख में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार का नाम शामिल है। इसी तरह पूर्व डीजीपी अतुल समेत पूरे देश भर में सैकड़ों की संख्या में तैनात प्रशासनिक अधिकारी लविवि की भूमि से ही निकले हैं।