ऑक्सीजन की कमी से कानपुर के एक हॉस्पिटल में छह बच्चों की मौत और लखनऊ स्थित केजीएमयू में एक सिलेंडर से तीन बच्चों को ऑक्सीजन दिए जाने के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने नाराजगी जताई है।
मरीजों को ऑक्सीजन देने में लापरवाही पर डीजी स्वास्थ्य सेवाएं, केजीएमयू वीसी सहित चार अधिकारियों को नोटिस दिया है।
आयोग ने कहा कि इस पूरे मामले में लापरवाही उजागर होने के बावजूद राज्य सरकार ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया।
राज्य मानवाधिकार आयोग ने यह कार्रवाई अमर उजाला में 21 जनवरी को छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए की है।
आयोग के आदेश के मुताबिक अमर उजाला में छपी खबर में कानपुर स्थित अस्पताल में ऑक्सीजन न मिलने से छह बच्चों की मौत की बात पता चली है।
यह मौतें कानपुर के बाल रोग चिकित्सालय के एनआईसीयू में ऑक्सीजन न मिलने की वजह से हुई थीं। इसके बाद ही लखनऊ स्थित केजीएमयू में बच्चों के इलाज में लापरवाही मिली थी।
यहां एक ही सिलेंडर से तीन बच्चों को ऑक्सीजन दी जा रही थी। तीनों बच्चों को एक ही ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे ट्रॉमा सेंटर से बाल रोग विभाग स्थित वार्ड में शिफ्ट किया गया था।
इससे इनकी जिंदगी को खतरा बन गया था। राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य जस्टिस यूके धवन ने कहा कि ऑक्सीजन एक लाइफ सेविंग गैस है। अखबार में छपी खबर के मुताबिक कानपुर के अस्पताल और केजीएमयू में जरूरी मात्रा में गैस उपलब्ध नहीं थी।
इसके लिए महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, सीएमओ लखनऊ व कानपुर और केजीएमयू वीसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। आयोग ने चारों अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।