फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मंजूनाथ हत्याकांड: जुड़ती गईं घटनाएं, जुटते गए सुबूत

Thu, 12 Mar 2015 09:24 AM IST
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
यह अनूठा संयोग था कि जब पुलिस को दो आरोपियों के साथ मंजूनाथ का शव मिला, वहां उनके मकान मालिक धनराज साहनी भी मौजूद थे। उन्होंने मौके पर मंजूनाथ के शव की शिनाख्त की। उनकी गवाही की वजह से पवन मित्तल सहित सभी अभियुक्तों के खिलाफ चश्मदीद गवाह और परिस्थितिजन्य सुबूत नहीं मिलने के बावजूद घटनाओं का क्रम जोड़ा जा सका।
विज्ञापन


ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट में यह मुकदमा लड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता आईबी सिंह ने बताया कि 20 नवंबर 2005 की सुबह सीतापुर के महौली पुलिस स्टेशन के हेडकांस्टेबल रामभवन सिंह नेशनल हाईवे पर पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान उन्होंने नदी के पास से मारुति 800 कार को जाते देखा। संदेह होने पर उसे रुकवाया।

अंदर विवेक शर्मा और राकेश कुमार आनंद बैठे थे। कार की तलाशी ली तो उसमें शव मिला। मौके पर भीड़ जमा हो गई। यह संयोग ही था कि मंजूनाथ के मकान मालिक धनराज साहनी अपने रिश्तेदार से मिलने वहीं से होते हुए सीतापुर जा रहे थे।
विज्ञापन


वे खीरी में कीरतनगर में रहते थे, जहां मंजूनाथ किराये पर रह रहे थे। भीड़ लगी देख धनराज भी मौके पर पहुंचे और शव को पहचानते ही तुरंत भीड़ को चीर कर पुलिस के सामने जा खड़े हुए। उन्होंने पुलिस को पहचान बताई।

कोर्ट ने भी खुद माना अनूठा संयोग

इसके बाद पुलिस ने विवेक और राकेश ने कड़ाई से पूछताछ की। इस पर दोनों ने मंजूनाथ का शव होने की बात कुबूल करते हुए हत्या और उसके आगे की सारी कहानी बयां कर डाली।

ट्रायल कोर्ट में इस मामले में कुल 23 गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए, जिनमें धनराज साहनी की गवाही सबसे मजबूत रही। हालांकि बचाव पक्ष ने महौली में उनकी मौजूदगी को संदेहास्पद बताया लेकिन कोर्ट ने इसे अनूठा संयोग मानते हुए स्वीकार किया।

मुकरे भी कुछ गवाह, लेकिन मोटिव पता चल चुका था
पवन मित्तल के जिस पेट्रोल पंप पर मंजूनाथ की हत्या हुई, उसके पास ही मकान में राजेंद्र सिंह ओर उनकी पत्नी बलविंदर कौर रहते थे।

उन्होंने शुरुआती बयानों में बताया था कि उन्होंने अपने घर से मंजूनाथ को 19 नवंबर 2005 को पेट्रोल पंप का निरीक्षण करते हुए देखा और बाद में गोलियां चलने की आवाज सुनी थी। हालांकि बाद में वे इस बयान से मुकर गए, लेकिन तब तक पुलिस को हत्या की वजह यानी ‘पेट्रोल पंप का निरीक्षण’ की बात पता चल चुकी थी।

हत्यारों के पास बचने का कोई मौका नहीं

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में अधिवक्ता आईबी सिंह ने कहा कि अब हत्यारों के पास सजा से बचने का कोई रास्ता नहीं है।

वे अपील नहीं कर सकते। केवल राज्यपाल या राष्ट्रपति से माफी की अपील कर सकते हैं। सिंह ने कहा कि यह केस कानूनी दृष्टि से बहुत मुश्किल था क्योंकि परिस्थितिजन्य साक्ष्य कम थे।

मंजूनाथ हत्याकांड : क्या हुआ था
आईओसी में सेल्स मैनेजर मंजूनाथ ने पेट्रोल में मिलावट की शिकायत सही पाए जाने पर लखीमपुर खीरी में दो पेट्रोल पंप तीन महीने के लिए सील करने का आदेश दिया। इसके बावजूद ये पेट्रोल पंप खुले रहे।

ऐसे में 19 नवंबर 2005 को मंजूनाथ ने यहां आकस्मिक निरीक्षण किया, लेकिन गोला कस्बे के पेट्रोल पंप के मालिक पवन कुमार मित्तल उर्फ मोनू ने गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी।

उसके दो कर्मचारी शव मंजूनाथ की ही कार की पिछली सीट पर रखकर सीतापुर में नदी में फेंकने चले गए, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी से पकड़े गए।

इसके बाद मामले में ये हुआ

ट्रायल कोर्ट: लखीमपुर खीरी के सेशन कोर्ट में यह केस लड़े आईबी सिंह ने बताया कि यहां हत्या के करीब 16 महीने बाद 16 मार्च 2007 को फैसला सुनाया गया। इसमें पवन मित्तल मुख्य अपराधी साबित हुआ जिसे फांसी की सजा दी गई और उसके सात सहयोगियों को उम्रकैद की सजा दी गई।

हाईकोर्ट: अपराधियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में अपील की, जहां 12 दिसंबर 2009 को फैसला सुनाया गया। इसमें पवन मित्तल व पांच अन्य सहयोगियों को उम्रकैद की सजा दी गई।

सुप्रीम कोर्ट: अपराधियों ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिस पर 19 नवंबर 2014 को पहली सुनवाई हुई। 19 नवंबर को ही मंजूनाथ की हत्या हुई थी और यह उनकी नौवीं बरसी थी। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
विज्ञापन

भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष की नजीर बने मंजूनाथ

मंजूनाथ कॉलेज में हरदिल अजीज स्वभाव और संगीत के प्रति लगाव के लिए पहचाने जाते थे। ‘मचान’ नाम से लोकप्रिय मंजूनाथ 2003 में आईआईएम लखनऊ के फेस्ट के वीडियो में इंडियन ओशियन बैंड के गाए गीत ‘कंडीसा’ पर परफॉर्म करते नजर आते हैं।

कंडीसा एक प्राचीन पूर्वी-सीरियाई प्रार्थना है जो आज भी केरल के चर्च में गाई जाती है। ‘आगेने धनुसा, नेहावे दुखराना’ (सर्वं समर्पयामि) गाते हुए वे खुद को सच के सामने समर्पित करते नजर आते हैं।

मंजूनाथ पर बीते वर्ष मई में एक फिल्म भी रिलीज की गई, जिसमें लखनऊ और आईआईएम में उनके जीवन और उनके हत्याकांड की घटनाओं को दिखाया गया। वहीं, लोकप्रिय गायक रब्बी शेरगिल ने न्याय के लिए लड़ते हुए मारे गए लोगों पर लिखे गीत में मंजूनाथ को ‘अन्ना’ के तौर पर संबोधित किया।

मुझे कहते हैं अन्ना मंजूनाथ
मैंने देखी भटकती एक लाश
जमीर की, बीच सड़क लखीमपुर खीरी
आदर्श फंसा जहां नारों में
और चोर भरे दरबारों में
वहां मौत अखलाक की है एक खबर बासी
जिन्हें नाज है हिंद पर वो कहां हैं, जिन्हें नाज है वो कहां है...
-गायक-गीतकार रब्बी शेरगिल, अपने गीत ‘जिन्हें नाज है...’ में मंजूनाथ पर लिखी पंक्तियां
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें