राजधानी में हॉलमार्क बिकने वाले गहने में सोने की शुद्धता पर सवालिया निशान लग गए हैं। आप हॉलमार्क गहने को खरीद कर जो कीमत चुका रहे उसके सोने की शुद्धता को जरूर परख लें।
कहीं ऐसा न हो कि आपने जो हॉलमार्क गहने खरीदे उसका सोना नकली हो। यानी गहने में सोने की शुद्धता की मुहर 91.5 फीसदी की और असल में सोना 70 फीसदी है। ऐसे गहने में सोने की जगह जस्ता,तांबा आदि की मिलावट होगी।
यह आशंका प्राचीन सराफा मंडी में गहने बेचने वाले बड़े कारोबारी के पास हॉलमार्क लेजर मशीन पाए जाने उत्पन्न हुई है। सराफा एसोसिएशन पदाधिकारियों ने यह हॉलमार्क लेजर मशीन जब्त कर ली।
कारोबारी नहीं रख सकते लेजर मशीन
सोने का अवैध धंधा करने वाले कारोबारी एसोसिएशन पर भारी पड़े तो हॉलमार्क लेजर मशीन कारोबारी को वापस कर दी। कारोबारी इस हॉलमार्क लेजर मशीन को लेकर पसोपेश में हैं,और कहना कि जिसके पास भारतीय मानक ब्यूरो में पंजीयन नहीं वह हॉलमार्क लेजर मशीन कैसे रख सकता है।
भारतीय मानक ब्यूरो ने सिर्फ हॉलमार्क सेंटर संचालक को हॉलमार्क लेजर मशीन लगाने परमीशन दे रखी। कारोबारियों ने बताया कि सोने का अवैध धंधा करने वाले सिंडीकेट इस हॉलमार्क लेजर मशीन का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।
ऐसी हॉलमार्क लेजर मशीन से प्रमाणित गहने बिकेंगे तो ग्राहक ठगे जाएंगे। दरअसल ग्राहक हॉलमार्क मुहर पर दर्ज सोने की शुद्धता की कीमत चुकाता है। ऐसी गड़बड़ी से हॉलमार्क गहनों की शुद्धता खतरे में पड़ गई है।
चौक सराफा एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ.राजकुमार वर्मा ने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो में पंजीकृत हॉलमार्क सेंटर संचालक ही लेजर मशीन रख सकता है। इस लेजर मशीन को कारोबारी को रखने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने बताया कि ग्राहकों को हॉलमार्क युक्त गहनों को खरीदना चाहिए। सहीं हॉलमार्क युक्त गहने पर पांच मुहर लगी होती हैं जिसमें सोने की शुद्धता से लेकर उसकी शुद्धता का प्रमाणित करने वाले हॉलमार्क सेंटर की मुहर लगी होती है। ग्राहकों को हॉलमार्क गहने में सोने की शुद्धता की जांच हॉलमार्क सेंटर से दोबारा कराना चाहिए।
लखनऊ सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष रवींद्रनाथ रस्तोगी कहते हैं किसोने के गहने बेचने वाले कारोबारी से हॉलमार्क लेजर मशीन जब्त किए जाने की एसोसिएशन की लोकल इकाई ने अवगत नहीं कराया है। अब संज्ञान में आ गया इस प्रकरण के तह तक जाकर पता लगाएंगे कि कारोबारी को हॉलमार्क लेजर मशीन रखने की जरूरत क्यों पड़ी।
सोने की खुद भी करें जांच
हॉल मार्क आभूषण बेचने के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) द्वारा सराफा कारोबारियों का रजिस्टर किया जाता है, केवल उन्हीं से हॉलमार्क्ड आभूषण खरीदें।
अगर हॉलमार्क किए गए आभूषण में कोई खोट निकलती है तो उसकी शिकायत करके सराफा से हर्जाना वसूला जा सकता है।
हॉलमार्क किए हुए आभूषण पर पांच बेहद छोटे चिह्न बनाए जाते हैं। पहला निशान तिकोन है जो बीआईएस का मार्क है, दूसरा निशान अंक होता है जो शुद्धता का कैरेट बताता है, तीसरा निशान हॉलमार्क करने वाले केंद्र का होता है, चौथा निशान एक अंग्रेजी अल्फाबेट होता है जो हॉलमार्किंग करने का वर्ष बताता है और पांचवां निशान सराफा कारोबारी का होता है।
आपने कहीं से कोई हॉलमार्क्ड आभूषण खरीदा है और उसकी जांच करना चाहते हैं तो इसके लिए बीआईएस द्वारा निर्धारित रेफरल लैब में संपर्क किया जा सकता है।
लखनऊ में ऐसे परीक्षण के लिए चौक और अमीनाबाद के तीन सराफा कारोबारी बीआईएस ने निर्धारित किए हैं जिनकी जानकारी बीआईएस की आधिकारिक वेबसाइट से ली जा सकती है।
हमेशा याद रखें कि हॉलमार्किंग में लगभग 5 से 6 घंटे का समय आभूषण की शुद्धता जांचने में लग सकता है, इसलिए बेहद विश्वसनीय सराफा कारोबारी से इसके लिए संपर्क करें।