प्रदेश में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की सख्त नाराजगी और दिए गए निर्देशों के मद्देनजर आवास विभाग ने एनसीआर समेत प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों को निर्माण से संबंधित सभी तरह की गतिविधियों को अग्रिम आदेश तक स्थगित रखने का निर्देश दिया है।
आवास विभाग ने खास तौर पर एनसीआर क्षेत्र में आने वाले गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़-पिलखुवा, बुलंदशहर-खुर्जा, बागपत-बड़ौत- खेकड़ा, मुजफ्फरनगर व सहारनपुर विकास प्राधिकरणों से वायु प्रदूषण रोकने के संबंध में उठाए गए कदम की रिपोर्ट भी मांगी गई है।
दरअसल दिवाली के बाद से ही दिल्ली समेत उप्र, हरियाणा व पंजाब के अधिकांश क्षेत्रों में फैले जानलेवा वायू प्रदूषण रोकने को लेकर सरकारों की लचर व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताते हुए सभी प्रदेश मुख्य सचिव को व्यक्तिगत तौर पर तलब किया है।
इसके साथ ही यह निर्देश दिए हैं कि अग्रिम आदेश तक वायु प्रदूषण से प्रभावित प्रदेशों में तत्काल प्रभाव से सभी तरह के निर्माण व धूल उड़ने से संबंधित कार्यों को रोक लगा दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर एनसीआर क्षेत्र में आने वाले विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में आदेश का उल्लंघन करने वालों पर एक लाख तक जुर्माना लगाने के भी निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कूड़ा जलाने वालों पर भी 5 हजार तक जुर्माना ठोकने के निर्देश दिए हैं। इसके मद्देनजर विशेष सचिव आवास अपूर्वा दूबे ने एनसीआर क्षेत्र में आने वाले सभी विकास प्राधिकरणों को जहां सुप्रीम कोर्ट केआदेश को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है, वहीं प्रदेश के अन्य विकास प्राधिकरणों को भी वायु प्रदूषण रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इसमें निर्माण सामग्री को ढंक कर रखने और उसपर पानी का छिड़काव करते रहने, ढुलाई करने वाले वाहनों की धुलाई कर चलाने और परिवहन के दौरान निर्माण सामग्री को ढंकने, सड़कों के किनारे मलवा न रखने, पेंड़ों से गिरने वाली पत्तियों व पार्कों से निकले वाले घास-फूस को जलाने के बजाय उसका कम्पोस्ट तैयार करने आदि के निर्देश दिए गए हैं।