लखनऊ। घरेलू महिलाएं भी मानसिक रोग से प्रभावित हो रही हैं। ये महिलाएं अपनी समस्याएं नहीं बता पातीं, जिससे वे अवसाद की शिकार होती हैं। बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी में मानसिक रोग के मरीजों में घरेलू महिलाओं की संख्या बीते कुछ समय से बढ़ी है। अनुमान के मुताबिक, दस मरीजों में से चार घरेलू महिलाएं हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार को बलरामपुर अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला ने यह जानकारी दी।
डॉ. देवाशीष ने बताया कि निरोसिस व साइकोसिस मानसिक रोग हैं। निरोसिस में मरीज को बीमारी के बारे में पता चल जाता है, लेकिन साइकोसिस के मरीज को इसका ज्ञान नहीं होता। परिजन उसे बीमारी के बारे में बताते हैं। साइकोसिस के मरीज कानों में अलग तरीके की आवाज आना, उन पर किसी और के जरिये नजर रखना, उनके बनाए फार्मूले को विदेशियों के चोरी करने का प्रयास करने जैसी अजीबोगरीब शिकायतें होती हैं।
शराब से ज्यादा घातक मोबाइल की लत
डॉ. देवाशीष ने कहा कि आज के दौर में मोबाइल की लत शराब से ज्यादा घातक हो चुकी है। मोबाइल पर रील बनाना और बाद में हर समय उस पर आने वाले कमेंट और लाइक देखकर खुश होना व लाइक, कमेंट कम होने पर अच्छा महसूस न करना युवाओं को मानसिक रोगी बना रहा है। इस लत से सभी वर्ग के लोग प्रभावित हैं। अस्पतालों में ऐसे रोगियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। खास बात है कि बच्चों के मोबाइल फोन देखने की शुरुआत खुद माता-पिता ही करते हैं।