नगर निगम के जोन चार में 40 हजार संपत्तियाें का गृहकर दोगुना तक बढ़ा
प्रवेंद्र गुप्ता
नगर निगम के जोन चार में करीब 40 हजार संपत्तियों का गृहकर दोगुना तक बढ़ गया है। यह बात सामने आई है गृहकर जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट में।
अब निगम प्रशासन इन संपत्तियाें के मालिकों को नोटिस भेज रहा है। अब तक करीब 27 हजार को नोटिस जारी किया जा चुका हैं।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी अशोक सिंह ने बताया कि भवन स्वामी बढ़े टैक्स पर आपत्ति भी कर सकते हैं। इसकी समय सीमा एक महीना है।
जांच में यदि सर्वे की रिपोर्ट गलत निकली तो गृहकर को कम कर दिया जाएगा। आपत्ति नहीं करने पर नया गृहकर लागू हो जाएगा।
शासन के आदेश के बाद नगर निगम शहर में गृहकर को लेकर संपत्तियों का जीआईएस सर्वे करा रहा है। इसमें गोमती नगर क्षेत्र में सर्वे पूरा हो गया है।
सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, जोन की करीब 50 हजार आवासीय और अनावासीय संपत्तियों में से 40 हजार का गृहकर दोगुना तक बढ़ गया है।
आवासीय और अनावासीय मिलाकर करीब 27 हजार संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी किया जा चुका है। मालूम हो कि जोन में कुल 10 हजार अनावासीय संपत्तियां हैं।
जानकारों का तर्क : सर्वे रिपोर्ट पूरी तरह सही नहीं
जीआईएस सर्वे रिपोर्ट में करीब 10 हजार नई संपत्तियां बढ़ी हैं। जानकारों का कहना है कि लेकिन यह आंकड़ा बहुत हद तक सही नहीं है क्योंकि इन संपत्तियों में कई तो पहले से ही नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। यही हीं, सर्वे में प्लाट एरिया भी गलत आया है। ऐसे बहुत से मामले हैं जिनमें सर्वे करने वाली संस्था ने अनुमानित प्लॉट एरिया लिख दिया है। भवनस्वामी का नाम भी गलत हो गया है। इसके चलते निगम को सर्वे रिपोर्ट और अपने रिकॉर्ड को मिलाना पड़ रहा है।
हर क्षेत्र का अलग होता है गृहकर निर्धारण
गृहकर निर्धारण के नियमों के तहत जीना, शौचालय, खुला क्षेत्र, पूजा घर और स्टोर आदि में गृहकर में रियायत रहती है। घर कच्चा है या पक्का, कितना पुराना और कितने मीटर चौड़ी सड़क पर है, इस आधार पर गृहकर निकाला जाता है। यदि सर्वे मेें इनमें कोई गड़बड़ी हुई होगी तो टैक्स भी बढ़ जाएगा।