महापौर सुषमा खर्कवाल का कहना है कि गृहकर पुनरीक्षित करने का काम राजस्व निरीक्षकों का है। यदि उन्होंने समय से उसे पुनरीक्षित नहीं किया तो यह उनकी गलती है। इस व्यवस्था को रोका जाएगा, क्योंकि अब जीआईएस सर्वे भी हो गया है। ऐसे में अब गृहकर पुनरीक्षित करने की एक समय सीमा तय कर दी गई है। अब वर्ष 2022 के पहले से किसी भवनस्वामी का गृहकर पुनरीक्षित नहीं किया जाएगा। जिसका भी होगा वह 2022 से ही किया जाएगा।
हर दो वर्ष में गृहकर पुनरीक्षित करने का नियम
नगर निगम अधिनियम के तहत हर दो वर्ष में गृहकर की दरों में बदलाव कर उनको बढ़ाया जा सकता है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। पिछली बार साल 2010 में गृहकर की दरें बढ़ाई गई थीं, उसके बाद उनको पुनरीक्षित नहीं किया गया। इतना ही नहीं, कर्मचारियों की लापरवाही के कारण 2010 के हिसाब से भी सभी भवनों का गृहकर रिवाइज नहीं हो पाया। ऐसे में अब जीआईएस के बाद जो बिल जा रहे हैं तो निगम कर्मी उन मकानों का गृहकर भी पीछे से रिवाइज कर दे रहे हैं, जिनका 2010 में नहीं हो पाया था। जिससे गृहकर कई गुना बढ़ जा रहा है।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि गृहकर 2022 से पहले पुनरीक्षित न किया जाए इसको लेकर 30 अक्तूबर को होने वाली कार्यकारिणी बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो समिति भी बनाई जाएगी। काफी पीछे से गृहकर बढ़ाए जाने से नियमित रूप से गृहकर जमा करने वाले भवनस्वामी परेशान होते हैं।