लखनऊ। शहर के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी अब गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। हालात यह हैं कि बर्न यूनिट जैसी अत्यंत जरूरी चिकित्सा सेवाएं भी बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आग से झुलसे मरीजों के इलाज के लिए शहर में कोई समुचित व्यवस्था नहीं बचेगी।
शहर में केवल तीन अस्पताल बलरामपुर, सिविल और रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में ही बर्न यूनिट संचालित हैं, लेकिन तीनों ही अस्पताल विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव से जूझ रहे हैं। सिविल अस्पताल में तैनात एकमात्र प्लास्टिक सर्जन रिटायरमेंट के बाद सेवाएं दे रहे हैं। उनके जाने के बाद यहां कोई विशेषज्ञ नहीं बचेगा। विशेषज्ञ की कमी के कारण ही पहले 50 बेड वाली इस यूनिट की क्षमता घटाकर आधी की जा चुकी है। अब एकमात्र प्लास्टिक सर्जन के जाने के बाद यूनिट के बंद होने का संकट खड़ा हो जाएगा।
वहीं, बलरामपुर अस्पताल की 10 बेड की बर्न यूनिट भी वर्षों से बिना प्लास्टिक सर्जन के चल रही है, जबकि रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल की 6 बेड की यूनिट में भी कोई विशेषज्ञ तैनात नहीं है। ऐसे में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को मजबूरन हायर सेंटर का रुख करना पड़ रहा है।
इन यूनिटों पर भी संकट :
सर्जन,पैथोलॉजिस्ट व रेडियोलॉजिस्ट तक नहीं
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय में सर्जन, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ तक के पद खाली हैं। मरीजों को सामान्य सर्जरी और जांच के लिए दूसरे अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सीएमएस डॉ. एसपी सिंह के मुताबिक, स्वीकृत पद के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती की मांग हुई है।
तीन दिन हो रही अल्ट्रासाउंड जांच
महानगर स्थित 100 बेड के भाऊराव देवरस संयुक्त चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच भी सप्ताह में केवल तीन दिन ही हो पा रही है, क्योंकि रेडियोलॉजिस्ट अटैच व्यवस्था पर निर्भर हैं। ठाकुरगंज और 50 बेड के आलमबाग अस्पताल में भी यही हाल है। इससे मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगी जांच कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
Iजिन जगह पर डॉक्टर नहीं थे। वहां डॉक्टर अटैच करके सेवा शुरू कराई गई है। अभी विशेषज्ञों के इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होनी है। विशेषज्ञ मिलने के बाद उन्हें अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। I
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- डॉ. पवन कुमार अरुण, स्वास्थ्य महानिदेशकI
बलरामपुर अस्पताल।
बलरामपुर अस्पताल।