लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग की बायोजेरोंटोलॉजी एवं न्यूरोबायोलॉजी प्रयोगशाला की खोज ने अल्जाइमर रोग से जूझ रहे लाखों लोगों को नई उम्मीद दी है। शोधकर्ताओं ने पान के पत्ते में पाए जाने वाले प्राकृतिक यौगिक हाइड्रॉक्सीचाविकोल को इस बीमारी के संभावित उपचार के रूप में चिह्नित किया है।
शोध दल ने उन्नत कंप्यूटेशनल तकनीकों के जरिये यह समझने का प्रयास किया कि हाइड्रॉक्सीचाविकोल मस्तिष्क से जुड़े प्रोटीनों पर किस तरह प्रभाव डालता है। विश्लेषण में 88 ऐसे जीन मिले, जो इस यौगिक और अल्जाइमर दोनों से जुड़े हैं। इनमें सीओएमटी, जीएपीडीएच जैसे तीन प्रमुख प्रोटीन ''हब टार्गेट'' के रूप में सामने आए हैं। ये स्मृति निर्माण, मस्तिष्क संकेतों के प्रवाह और न्यूरॉन्स की सुरक्षा में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। मुख्य शोधकर्ता डॉ. नितीश राय ने बताया कि यह शोध अभी प्रारंभिक चरण में है। आगे गहन प्रयोगशाला एवं नैदानिक परीक्षण जरूरी होंगे।