संजय गांधी पीजीआई में सालाना 120 से 125 गुर्दा प्रत्यारोपण हो रहे हैं। इसके लगभग तीन गुना लोग प्रत्यारोपण कराने की लाइन में हैं और डायलिसिस पर हैं, लेकिन ये वेटिंग अब कम होने की उम्मीद पैदा हो गई है।
प्रदेश सरकार ने केजीएमयू को अंगदान कराने और ऑर्गन ट्रांसप्लांट विभाग खोलने की अनुमति देकर गुर्दे,लिवर,कार्निया प्रत्यारोपण का इंतजार रहे हजारों रोगियों को दोबारा जीवन की उम्मीद जगा दी है।
गुर्दे और लिवर न मिलने के कारण प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे मरीजों को अब मस्तिष्क मृत (ब्रेन डेड) व्यक्ति के दान किए गए अंग मिल सकेंगे।
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मस्तिष्क मृत रोगियों का अंगदान कराने की अनुमति मिलने के बाद ये उम्मीद बंधी है।
इससे संजय गांधी पीजीआई को तो फायदा होगा ही केजीएमयू में भी नया अंग प्रत्यारोपण खुलने से अधिक मरीज नया जीवन पा सकेंगे। पीजीआई में अभी सालाना लगभग 125 गुर्दा प्रत्यारोपण हो रहे हैं।
यदि सब कुछ सही रहा तो ये संख्या बढ़कर दोगुनी हो जाएगी। एसजीपीजीआई निदेशक की मानें तो भारत में वर्तमान में 0.7 फीसदी कैडवर (मस्तिष्क मृत) लोगों का ही अंगदान हो रहा है।
यदि ये प्रतिशत बढ़कर एक फीसदी हो जाए तो साल में 2200 गुर्दे मिल जाएंगे। संजय गांधी पीजीआई ही अब तक तीन हजार से अधिक गुर्दा प्रत्यारोपण कर चुका है,लेकिन इनमें से सिर्फ पांच प्रत्यारोपण ब्रेन डेड मरीजों से लिए गए गुर्दे से हुए हैं।
संजय गांधी पीजीआई पहले से ही नेशनल ऑर्गन शेयरिंग नेटवर्क का सदस्य है। अभी तक वो अन्य प्रदेशों से मिलने वाले अंगों के ऊपर निर्भर था।
अब ट्रॉमा सेंटर से उसकी जरूरत पूरी हो सकेगी। इसका लाभ लिवर, कार्निया, पैंक्रियाज आदि ट्रांसप्लांट कराने का इंतजार कर रहे मरीजों को भी मिलेगा।