होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)
के अभ्यर्थियों को झटका लगा है।
कुल पदों में ओबीसी के लिए आरक्षित पदों
में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कटौती कर दी है। इससे 25
अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
वहीं होम्योपैथी मेडिकल कॉलेजों
में प्राचार्य के ओबीसी कोटे के एक पद को भी अधिकारियों ने खत्म कर दिया
है। इसे महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है।
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चिकित्सा
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जान-बूझकर ओबीसी वर्ग के कोटे के पदों में
कटौती कर दी। यहां तक कि अगस्त में भर्ती का विज्ञापन भी निकाल दिया लेकिन
प्रांतीय होम्योपैथी शिक्षक संघ ने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया।
इसके बाद पूरे
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से की गई है। मुख्यमंत्री ही
चिकित्सा शिक्षा विभाग के भी मुखिया हैं। होम्योपैथी
चिकित्साधिकारियों के 177 पदों के लिए गत 24 अगस्त को विज्ञापन जारी किया
गया था।
इस भर्ती में प्रदेश में दिए जा रहे आरक्षण के अनुसार अनुसूचित
जाति-जनजाति को दिए जाने वाले 23 फीसदी कोटे के अनुसार 41 सीटों होती हैं।
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चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसे तो बरकरार रखा लेकिन ओबीसी
कोटे (27 फीसदी) के अनुसार मिलने वाली 48 सीटों में 25 की कटौती कर दी।
ओबीसी कोटे में सिर्फ 23 सीटें ही रखी गईं।
इसी
तरह प्राचार्य के दो रिक्त पदों पर भी अधिकारियों ने खेल कर दिया। लखनऊ
होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएन सिंह और इलाहाबाद के
प्राचार्य डॉ. केएन यादव के सेवानिवृत्त होने के बाद सात में से दो पद
रिक्त थे।
इन दो रिक्त पदों का विज्ञापन निकालते समय भी एक पद को महिला के
लिए आरक्षित कर दिया गया।
इसमें भी अधिकारियों ने ओबीसी कोटे का एक पद खत्म
कर दिया, जबकि नियमानुसार महिला वर्ग को 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण दिया
जाता है। उधर प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा जे.पी.शर्मा का कहना है कि
उन्हें ऐसे किसी विज्ञापन की जानकारी नहीं है।
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