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Lucknow News: लोकोत्सव में बिखरे होली और आल्हा के रंग

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लोकोत्सव में बिखरे होली और आल्हा के रंग
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से दो दिवसीय लोकोत्सव का आयोजन अकादमी परिसर के मुक्ताकाशीय मंच पर शनिवार को किया गया। लोकगायिका डॉ. सुचरिता गुप्ता ने गौरा संग भोला खेलत होरी... और आल्हा गायक जितेंद्र चौरसिया ने बड़े लड़इया महोबा वाले, जिनसे हार गई तलवार... सुनाकर लोकोत्सव की पहली शाम को यादगार बना दिया।
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डॉ. सुचरिता गुप्ता ने शुरुआत मशहूर ठुमरी री मैं कैसे केसर रंग घोरू... से की। अब के होरी मैं खेलूंगी श्याम से डट के... बारामासा दुपहरिया बितायला हो, नई झुलनी के छहिया बलम... सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। लोकप्रिय दादरा रूठ गए सइया हमार... के बाद उन्होंने नवरात्र और नव संवत्सर के स्वागत में चैती लोक गायन की प्रस्तुति दी। इसके बाद बुंदेलखंड लोक कला समिति महोबा के लोकप्रिय आल्हा गायक जितेंद्र चौरसिया ने महोबा की लड़ाई, मांडवगढ़ की लड़ाई और कजली का युद्ध पारंपरिक वीर रस से सराबोर शैली में सुनाया तो श्रोताओं में जोश भर गया। उनके साथ गायन में शरद अनुरागी, राहुल अनुरागी और दुष्यंत बुन्देला ने साथ दिया। अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह और निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर और बिरजू महाराज कथक संस्थान की उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी सहित अन्य विशिष्टजन उपस्थित रहे। संचालन राजेंद्र विश्वकर्मा ने किया।

लोकोत्सव में बिखरे होली और आल्हा के रंग

लोकोत्सव में बिखरे होली और आल्हा के रंग

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