राजधानी लखनऊ में फर्जी मार्कशीट मामले में एक बार फिर महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विवि उत्तराखंड का नाम सामने आया है। एक अभ्यर्थी ने इस विश्वविद्यालय की मार्कशीट सरकारी स्कूल में नौकरी के लिए लगाई थी। छानबीन में पता चला कि मार्कशीट फर्जी है।
प्रधानाचार्य ने आरटीआई के जरिये महाराजा अग्रसेन हिमालयन गढ़वाल विवि से जवाब मांगा था। लेकिन, प्रशासन ने कोई उत्तर नहीं दिया था। ऐसे में तत्कालीन राज्य सूचना आयुक्त ने मौके पर ही मार्कशीट का सत्यापन किया तो वह फर्जी पाई गई थी। विवि में जब संबंधित छात्र के रिकॉर्ड देखे गए तो वहां कुछ नहीं मिला। साथ ही विवि ने ऐसे किसी छात्र को मार्कशीट जारी करने की बात से इन्कार कर दिया था। इस पर आयोग ने विवि प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा था।
मार्कशीट और डिग्री बनाने के मामले में पकड़े गए आरोपियों ने 2021 से अब तक 1500 छात्रों को फर्जी मार्कशीट बेची थी। ऐसे में पूरी आशंका है कि जिस छात्र ने मेरठ में प्रवक्ता पद के लिए आवेदन किया था, वह 1500 छात्रों में से ही एक हो। क्योंकि इसकी पूरी संभावना बनी हुई है कि 1500 छात्रों ने प्राइवेट के साथ ही सरकारी विभागों में आवेदन किए हों या फिर उनकी नौकरी भी लग चुकी हो। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच चल रही है। गिरोह के तीन लोगों की तलाश की जा रही है। इनके पकड़े जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।