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Lucknow News: गठिया रोगियों में हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा ज्यादा

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लखनऊ। गठिया के मरीजों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है। इसकी वजह जोड़ों की सूजन और खून में मौजूद दो प्रमुख एंटीबॉडी रूमेटाइड फैक्टर (आरएफ) और एंटी-साइक्लिक सिट्रुलिनेटेड पेप्टाइड (एसीपीए) हैं।
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ये तथ्य संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजी-पीजीआई) समेत 10 देशों के 13 चिकित्सा संस्थानों के संयुक्त अध्ययन में सामने आया है। यह अध्ययन 3952 रूमेटाइड आर्थराइटिस (आमवात गठिया) मरीजों पर किया गया। अध्ययन में उन गठिया रोगियों को शामिल किया गया था जिनमें पहले से हृदय रोग नहीं था। अध्ययन में पाया गया कि बाद में 184 मरीजों को हृदय से जुड़ी परेशानी हुई। इनमें 102 मरीजों को हार्ट अटैक और 68 को स्ट्रोक पड़ा। अन्य 14 मरीजों की मौत हृदय संबंधी कारणों से हुई। इस अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय रूमेटिक और मस्कुलोस्केलेटल डिजीज जर्नल में स्थान मिला है।


अध्ययन का नेतृत्व पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग के डॉ. दुर्गा प्रसन्ना मिश्रा ने किया। उन्होंने बताया कि मरीजों के खून में मौजूद एंटीबॉडी रूमेटाइड फैक्टर और एंटी-साइक्लिक सिट्रुलिनेटेड पेप्टाइड एंटीबॉडी हृदय रोग का जोखिम बढ़ाते हैं। जिन गठिया मरीजों में ये एंटीबॉडी अधिक थी, उनमें हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा भी अधिक पाया गया।
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मरीजों में ऐसे बढ़ता है खतरा
एंटीबॉडी केवल जोड़ों में ही नहीं, बल्कि रक्त वाहिकाओं में भी सूजन बढ़ाकर दिल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। गठिया की पुरानी सूजन धमनियों को सख्त बनाती है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है।

गठिया मरीजों को सलाह
रूमेटाइड आर्थराइटिस के मरीजों की नियमित हृदय जांच, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और अन्य जोखिम पर नजर रखनी चाहिए। समय पर सूजन को नियंत्रित करने से न केवल जोड़ों को नुकसान से बचाया जा सकता है बल्कि दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
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